रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ग्रीनलैंड की क्या कीमत लगाई? ट्रंप की मौज, लेकिन EU के जख्मों पर छिड़का नमक

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगर ग्रीनलैंड खरीदना चाहते हैं, तो डेनमार्क से इसकी कीमत 200 से 250 मिलियन डॉलर (लगभग 23 अरब रुपये) के बीच हो सकती है. पुतिन ने यह बात 21 जनवरी 2026 को रूस की सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक में कही. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला रूस से जुड़ा नहीं है. अमेरिका और डेनमार्क इसे आपस में सुलझा लेंगे.

पुतिन ने ग्रीनलैंड की क्या कीमत लगाई?

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगर ग्रीनलैंड खरीदना चाहते हैं, तो डेनमार्क से इसकी कीमत 200 से 250 मिलियन डॉलर (लगभग 23 अरब रुपये) के बीच हो सकती है. पुतिन ने यह बात 21 जनवरी 2026 को रूस की सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक में कही. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला रूस से जुड़ा नहीं है. अमेरिका और डेनमार्क इसे आपस में सुलझा लेंगे.

पुतिन ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि रूस ने 19वीं सदी यानी 1867 में अमेरिका को 7.2 बिलियन डॉलर में अलास्का बेच दिया था. आज की कीमत के हिसाब से यह रकम लगभग 158 मिलियन डॉलर होती है. अलास्का का क्षेत्रफल 1.717 मिलियन स्क्वायर किलोमीटर है, जबकि ग्रीनलैंड का क्षेत्रफल 2.166 मिलियन स्क्वायर किलोमीटर से ज्यादा है यानी थोड़ा बड़ा. इसी आधार पर पुतिन ने ग्रीनलैंड की कीमत 200-250 मिलियन डॉलर बताई है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के लिए यह रकम आसानी से चुकाई जा सकती है.

डेनमार्क ने अमेरिका को बेचे थे वर्जिन आइसलैंड्स

पुतिन ने एक और ऐतिहासिक बात याद दिलाई कि 1917 में डेनमार्क ने वर्जिन आइलैंड्स अमेरिका को बेच दिए थे. उन्होंने डेनमार्क पर तंज कसा कि डेनमार्क ने हमेशा ग्रीनलैंड को कॉलोनी की तरह ट्रीट किया है और वहां के लोगों के साथ काफी सख्ती या क्रूरता से पेश आया है. लेकिन पुतिन ने जोर दिया कि रूस को इस मामले में कोई दिलचस्पी नहीं है. उन्होंने कहा, ‘यह हमारे लिए बिल्कुल भी मायने नहीं रखता. मुझे लगता है कि वे इसे आपस में सुलझा लेंगे.’

ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर फ्रेमवर्क की बात कही

यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ट्रंप ने दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में ग्रीनलैंड खरीदने की बात दोहराई है. ट्रंप ने पहले टैरिफ लगाने या बल प्रयोग की धमकी दी थी, लेकिन अब उन्होंने कहा है कि वे फोर्स नहीं इस्तेमाल करेंगे और यूरोप पर टैरिफ भी नहीं लगाएंगे. उन्होंने एक ‘फ्रेमवर्क’ पर सहमति होने की बात कही है. डेनमार्क ने ट्रंप की धमकियों का विरोध किया था और कहा था कि ग्रीनलैंड बिकने वाला नहीं है.

पुतिन की यह टिप्पणी यूरोप के लिए तंज भरी है, क्योंकि इससे अमेरिका-यूरोप के बीच बढ़ते मतभेद पर नमक छिड़का गया लगता है. रूस ने खुले तौर पर ट्रंप के इस कदम का विरोध नहीं किया, बल्कि इसे अमेरिका-डेनमार्क का द्विपक्षीय मुद्दा बताया. ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, जहां खनिज संसाधन और सैन्य महत्व है.

Read More at www.abplive.com