भारत बन जाएगा दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, चीन-अमेरिका सब पीछे, चौंकाने वाली भविष्यवाणी

अमेरिका की बड़ी प्राइवेट इक्विटी कंपनी कार्लिल ग्रुप के को-फाउंडर डेविड रुबेनस्टीन ने कहा है कि भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और अगले दो-तीन दशकों में दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी बन सकता है. उन्होंने यह बात दावोस में चल हे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में एक इंटरव्यू में कही है.

रुबेनस्टीन ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हमारे जीते जी भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. मैं कहूंगा कि शायद 20-30 साल में यह हो सकता है.’

भारत की मौजूदा स्थिति क्या है?

भारत अभी दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. यह दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था है. जल्द ही जर्मनी को पीछे छोड़कर भारत तीसरे नंबर पर पहुंच सकता है. अभी अमेरिका सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, उसके बाद चीन दूसरे नंबर पर है. भारत की तेज तरक्की से वह अमेरिका और चीन दोनों को पीछे छोड़ देगा. उन्होंने भारत की युवा आबादी का फायदा भी बताया, जो लंबे समय में बहुत मदद करेगा.’

रुबेनस्टीन ने भारत को क्या सलाह दी?

उन्होंने भारतीय नीति बनाने वालों से कहा कि ग्लोबल प्राइवेट क्रेडिट और प्राइवेट इक्विटी (PE) को पश्चिमी निवेश की तरह न देखें. प्राइवेट इक्विटी का मतलब है कंपनियां ऐसी फर्मों में पैसा लगाती हैं जो अभी शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं हैं. प्राइवेट क्रेडिट का मतलब है कंपनियां सीधे कर्ज देती हैं, बैंक के जरिए नहीं. रुबेनस्टीन ने कहा, ‘अगर इन बाजारों को बढ़ने दिया जाए, तो अच्छी पूंजी वाले भारतीय उद्यमी भारत में आएंगे और कई लोग भारत में ही रहकर काम करेंगे.’ इस ग्रुप ने भारत की विभिन्न सेक्टर की कंपनियों में 8 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है.

अमेरिका-भारत रिश्तों पर क्या कहा?

रुबेनस्टीन ने कहा कि अमेरिका और भारत के रिश्तों को लेकर कोई चिंता नहीं है. उन्होंने बताया, ‘राष्ट्रपति ट्रंप आम तौर पर भारत के साथ अमेरिका के रिश्तों को लेकर काफी सकारात्मक रहे हैं. उन्होंने अपने एक बहुत करीबी सहयोगी को राजदूत बनाकर भेजा है.’

ट्रंप और जिनपिंग के मजबूत रिश्ते

रुबेनस्टीन ने कहा कि ट्रंप की चीन नीति का मकसद चीन को नुकसान पहुंचाना नहीं था, बल्कि व्यापार में असंतुलन ठीक करना था. चीन ने दूसरे बाजारों में ज्यादा बिक्री करके अपना सालाना सरप्लस एक ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा कर लिया है. लेकिन ट्रंप के लिए चीन उतना बड़ा मुद्दा नहीं जितना रूस-यूक्रेन का मामला है. उन्होंने कहा कि ट्रंप को लगता है उनके और शी जिनपिंग के अच्छे रिश्ते हैं और वे इस साल कम से कम दो बार मिलेंगे. शायद कोई समझौता भी हो जाए.

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