
Share Market Fall: भारतीय शेयर बाजारों में गुरुवार 22 जनवरी को शुरुआती तेजी के बाद तेज मुनाफावसूली देखने को मिली। ग्लोबल बाजारों से मिले मजबूत संकेतों के बीच सेंसेक्स और निफ्टी ने दिन की शुरुआत बढ़त के साथ की थी, लेकिन कुछ ही घंटों में निवेशकों ने ऊपरी स्तरों पर मुनाफा काटना शुरू कर दिया। इससे दोनों इंडेक्स अपने दिन के हाई से काफी नीचे आ गए।
सुबह करीब 9:48 बजे, निफ्टी 1.09 प्रतिशत की तेजी के साथ 25,430.3 के स्तर पर कारोबार था। वहीं बीएसई सेंसेक्स 1.03 प्रतिशत उछलकर 82,751.95 तक पहुंच गया था। यह तेजी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड पर नरम रुख और यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी से पीछे हटने के बाद आई। हालांकि, यह तेजी ज्यादा देर टिक नहीं पाया।
जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, शेयर बाजार में ऊंचे स्तरों पर बिकवाली देखने को मिली और सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर से करीब 700 अंकों से भी अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी भी 25,200 के नीचे फिसल गया। दोपहर 12 बजे के करीब, सेंसेक्स 47.76 अंक या 0.05 फीसदी की मामूली बढ़त के साथ 81,957.39 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 31.40 अंक 0.12 फीसदी की तेजी के साथ 25,188.90 के स्तप पर कारोबार कर रहा था।
शेयर बाजार में आज की इस तेज उठापटक के पीछे 3 बड़े कारण रहे-
1. मुनाफावसूली ने रोकी तेजी
शेयर बाजार में आज की उठापटक के पीछे सबसे बड़ी वजह तेज मुनाफावसूली रही। पिछले तीन कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद बाजार में आई तेज रिकवरी ने कई निवेशकों को ऊपरी स्तरों पर मुनाफा बुक करने का मौका दिया। बैंकिंग शेयरों में भी यही रुझान देखने को मिला। बैंक निफ्टी दिन के उच्च स्तर से करीब 1 प्रतिशत फिसला। हालांकि सुबह 11 बजे के आसपास यह मामूली बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हालिया तेजी काफी हद तक शॉर्ट कवरिंग और रिलीफ रैली का नतीजा थी, इसलिए ऊंचे स्तरों पर बाजार के लिए टिके रह पाना मुश्किल रहा।
चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह ने बताया, “निफ्टी के लिए 25,250–25,300 का दायरा अब तुरंत रेजिस्टेंस बन गया है। इस स्तर तक अगर बाजार में रिकवरी होती है, तो वहां बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है। नीचे की ओर 25,000 का स्तर मनोवैज्ञानिक और तकनीकी रूप से बेहद अहम सपोर्ट बना हुआ है। अगर निफ्टी इस स्तर से नीचे मजबूती से टूटता है, तो आने वाले समय में इसमें 24,800–24,900 तक और गिरावट देखने को मिल सकती है।”
आकाश शाह के मुताबिक, फिलहाल मोमेंटम इंडिकेटर्स कमजोर बने हुए हैं, हालांकि ओवरसोल्ड स्थिति के चलते थोड़ी देर के लिए राहत भरी तेजी संभव है।
2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव कायम
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने भी शेयर बाजार पर दबाव बनाए रखा है। बुधवार 21 जनवरी को विदेशी निवेशकों ने लगातार 12वें दिन भारतीय शेयर बाजार से पैसे निकाले। जनवरी महीने में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से करीब 34,000 करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं।
आकाश शाह ने बताया कि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बेंचमार्क इंडेक्सों पर दबाव बनाए हुए है। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) चुनिंदा शेयरों में खरीदारी कर गिरावट को पूरी तरह तेज होने से रोक रहे हैं। यही वजह है कि शयर बाजार में बड़ी गिरावट तो नहीं आई, लेकिन तेजी भी टिक नहीं पाई।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट वीके विजयकुमार ने पिछले हफ्ते कहा कि फिलहाल ऐसा लग रहा है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली तब तक जारी रह सकती है, जब तक बाजार में तेजी के लिए कोई बड़ा पॉजिटिव ट्रिगर नहीं मिलता।
3. नए लेबर कोड का असर Q3 नतीजों पर
शेयर बाजार में आज कई शेयरों में तिमाही नतीजों के बाद तेज उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। जोमैटो की पैरेंट कंपनी Eternal के शेयरों में शुरुआत में 6 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई थी, लेकिन बाद में शेयर अपनी सारी बढ़त खोकर करीब 1 फीसदी नीचे चला गया। बाजार को चिंता थी कि नए लेबर कोड से जुड़ी लागत का असर कंपनियों की तीसरी तिमाही के मुनाफे पर पड़ा है।
वीके विजयकुमार ने कहा कई कंपनियों को नए लेबर कोड के चलते ज्यादा प्रोविजंस करना पड़ा है, जिसका असर उनके दिसंबर तिमाही के मुनाफे पर पड़ा है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि बाजार इस असर को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेगा, क्योंकि यह एक बार का खर्च है।
4. सीमित दायरे में रुपया
भारतीय रुपया गुरुवार को 91.53 पर ऊपर खुला और तब से अधिकतर रेंजबाउंड ट्रेड कर रहा है। भारतीय करेंसी पर दबाव अभी भी इसके खिलाफ है। यह पैटर्न हाल के दिनों में बार-बार देखा गया है, जहां रुपये के लिए अपनी रिकवरी को बनाए रखने में मुश्किल हुई है। इससे पहले बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 0.8% गिरकर 91.74 के लिए नए ऑल-टाइम लो पर चला गया था।
टेक्निकल चार्ट्स से क्या मिल रहे संकेत?
जियोजित इनवेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स का कहना है कि बुधवार को 25,300 के स्तर के आसपास निफ्टी की तेजी टिक नहीं पाई थी, जिससे नीचे की ओर फिसलने की आशंका बनी हुई थी। हालांकि, निचले बोलिंजर बैंड के पास बना डोजी पैटर्न और 200-दिनों का सिंपल मूविंग एवरेज की निकटता यह संकेत देती है कि बाजार में कुछ समय के लिए कंसोलिडेशन या स्थिरता आ सकती है। उनके मुताबिक, अगर निफ्टी सीधे 25,300 के ऊपर निकलने में सफल रहता है, तो आगे 25,470 से 25,580 तक की तेजी भी संभव है।
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