शंकराचार्य को नोटिस जारी होने पर बोले अखिलेश, अहंकार तो दशमुखी का भी नहीं बचा था, इन एक मुखी का क्या बचेगा?

लखनऊ। प्रयागराज माघ मेला (Prayagraj Magh Mela) में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच छिड़ा विवाद अब सियासी रूप ले चुका है। इस विवाद में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पार्टी कूद पड़ी है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Samajwadi Party National President Akhilesh Yadav) ने मंगलवार को एक्स पोस्ट पर लिखा कि घोर निंदनीय!

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बता दें कि ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati of Jyotishpeeth) और प्रयागराज मेला प्राधिकरण (Prayagraj Mela Authority) के बीच चल रहे विवाद के बीच एक नया मोड़ आ गया है। मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी करके कहा है कि आप 24 घंटे में स्पष्ट करें और प्रमाण दें कि आप शंकराचार्य हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के बाद भी आप अपने नाम के आगे शंकराचार्य लिख रहे हैं जो कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेश का उल्लंघन है।

इस मामले में अखिलेश यादव ने लिखा कि मांगने वाले पहले ख़ुद अपना प्रमाणपत्र दें। विभाजनकारी भाजपाई और उनके संगी-साथियों की सोच इस हद तक गिर जाएगी, ये किसी ने नहीं सोचा था। भाजपा सत्ता और धन के सिवा किसी की भी सगी नहीं है। अहंकार तो दशमुखी का भी नहीं बचा था, इन एक मुखी का क्या बचेगा।

सरकार कहां है? सफ़ाईकर्मियों का बकाया तुरंत भुगतान करे

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अखिलेश यादव ने एक्स पर वीडियो शेयर कर लिखा कि माघ मेले में मानदेय न मिलने पर सफाई कर्मियों ने माघ मेले का काम ठप कर दिया है। कड़कड़ाती ठंड में दिन-रात काम करने वाले सफ़ाईकर्मियों का बकाया तुरंत दिया जाए और मेले का प्रशासन-प्रबंधन सुचारू रूप से हो। अस्वच्छता के कारण अस्वास्थ्यकारी हालात पैदा हो सकते हैं। सरकार कहां है?

मेलाक्षेत्र के संजय का ‘धृतराष्ट्र’ कौन है? जिसको सुनाया-दिखाया जा रहा था आँखों देखा हाल : अखिलेश यादव

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अखिलेश यादव ने लिखा कि भाजपा के महाभ्रष्ट राज में मेले के नाम पर पचासों हज़ार की महा-रकम कमीशन के रूप में गटक जाने का नया खेल शुरू हुआ है। इसीलिए उन साधु-संतों को भी सम्मान नहीं मिल पा रहा है, जो मेले की शोभा होते हैं। जिनका दर्शन मात्र ही आशीर्वाद होता है, उनके साथ बेहद आपत्तिजनक-अपमानजनक हिंसक दुर्व्यवहार शासन-प्रशासन इसलिए कर रहा है क्योंकि ‘मेला महाभ्रष्टाचार’ की कमीशनख़ोरी के इस गोरखधंधे में भाजपाई गुट की मिलीभगत है। इसीलिए जो भी मेले की दुर्व्यवस्था और बदइंतज़ामी के बारे में बोलेगा वो भाजपाई और उनके संगी-साथियों के साथ-साथ ‘संगीधिकारियों’ के निशाने पर होगा और सरेआम शिकार होगा।

मेलाक्षेत्र के संजय का ‘धृतराष्ट्र’ कौन है, जिसको आंखों देखा हाल सुनाया-दिखाया जा रहा था। भाजपा को कमिश्नर की जगह ‘कमीशनर’ की नयी पोस्ट बना देनी चाहिए। कुछ तो है जिसमें हिस्सेदारी है।

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