यूरोपीय संसद ने बुधवार (21 जनवरी, 2026) को अमेरिका के साथ यूरोपीय संघ (EU) के व्यापार समझौते को सस्पेंड कर दिया है. यूरोपीय संसद ने इस फैसले से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को तगड़ा झटका दिया है. दरअसल, अमेरिका और EU ने इस ट्रेड डील को लेकर जुलाई, 2025 में सहमति जताई थी, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के ग्रीनलैंड को हासिल करने की मांग और इस योजना का विरोध करने वाले यूरोपीय सहयोगियों पर ट्रंप की ओर से टैरिफ लगाने की धमकियों के विरोध में यूरोपीय संसद ने यह कदम उठाया है.
यूरोपीय संसद के सदस्य और EU-US व्यापार संबंधों पर INTA समिति के अध्यक्ष बर्न्ड लैंगे ने बुधवार (21 जनवरी, 2026) को जारी एक बयान में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से यूरोपीय देशों पर 10 से 25 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की योजनाएं उस व्यापार समझौते की शर्तों के खिलाफ हैं.
दावोस में ट्रंप का संबोधन पर क्या बोले लैंगे?
स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के वार्षिक बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संबोधन का हवाला देते हुए बर्न्ड लैंगे ने कहा, ‘मुझे लगता है कि उन्होंने अपना रुख नहीं बदला है. वह ग्रीनलैंड को जितनी जल्दी हो सके अमेरिका का हिस्सा बनाना चाहते हैं.’
दावोस में दिए अपने भाषण में अमेरिकी राष्ट्रपति ने आर्कटिक क्षेत्र में स्थित इस भूभाग (ग्रीनलैंड) पर कब्जे को लेकर तत्काल वार्ता की मांग की. हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में सैन्य बल का इस्तेमाल करने से इनकार किया. इस प्रतिबद्धता को लैंगे ने एक छोटा सकारात्मक पहलू बताया, लेकिन लैंगे ने कहा कि 10 से 25 प्रतिशत टैरिफ का प्रस्ताव अभी भी बना हुआ है.
जब तक धमकियां खत्म नहीं होतीं, समझौते की संभावना नहीं- लैंगे
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक इस तरह की धमकियां खत्म नहीं होतीं, तब तक किसी भी तरह के समझौते की कोई संभावना नहीं है. उन्होंने कहा, ‘हम प्रक्रिया को रोककर रखेंगे. जब तक ग्रीनलैंड और इन धमकियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती.’
लैंगे ने आरोप लगाया कि ट्रंप टैरिफ को राजनीतिक दबाव के हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि ग्रीनलैंड को खरीदा जा सके. उन्होंने इस कदम को यूरोपीय संघ की आर्थिक और क्षेत्रीय संप्रभुता पर हमला करार दिया.
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