बेंगलुरु में एक दिल दहला देने वाली घटना हुई, जिसमें 34 साल के गैराज मैकेनिक वेंकटरमनन की हार्ट अटैक से मौत हो गई. 16 दिसंबर 2025 की सुबह करीब 3:30 बजे उनकी पत्नी उन्हें बचाने के लिए बाइक पर अस्पताल ले जा रही थीं, लेकिन रास्ते में एक्सीडेंट हो गया. पत्नी खून से लथपथ सड़क पर हाथ जोड़कर मदद मांगती रहीं, लेकिन कई मिनट तक कोई नहीं रुका. आखिरकार एक कैब ड्राइवर ने मदद की और उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
आधी रात को दिल का दौरा पड़ा, पहले अस्पताल में डॉक्टर नहीं मिले
वेंकटरमनन दक्षिण बेंगलुरु के बालाजी नगर में अपनी पत्नी, 5 साल के बेटे, 18 महीने की बेटी और मां के साथ रहते थे. 16 दिसंबर 2025 की सुबह करीब 3:30 बजे उन्हें घर पर तेज सीने में दर्द हुआ. पत्नी उन्हें फौरन बाइक पर लेकर नजदीकी पहले प्राइवेट अस्पताल पहुंचीं, लेकिन वहां डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं थे, इसलिए इलाज नहीं मिला और उन्हें मना कर दिया गया.
दूसरे अस्पताल में इमरजेंसी ट्रीटमेंट नहीं मिला
फिर वह दूसरे प्राइवेट अस्पताल गए. वहां ECG किया गया, जिसमें माइल्ड हार्ट अटैक का पता चला. लेकिन वहां भी इमरजेंसी ट्रीटमेंट शुरू नहीं किया गया और न ही एम्बुलेंस दी गई. डॉक्टरों ने उन्हें जयनगर के श्री जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवस्कुलर साइंसेज जैसे बड़े अस्पताल जाने को कह दिया था.
तीसरे अस्पताल जाते वक्त एक्सीडेंट हुआ
वेंकटरमनन की पत्नी ने एम्बुलेंस बुलाने की कोशिश की, लेकिन सही रिस्पॉन्स नहीं मिला. फिर मजबूरन दोनों बाइक पर निकले लेकिन रास्ते में एक्सीडेंट हो गया. वेंकटरमनन सड़क पर दर्द से कराहते गिर पड़े. पत्नी खुद घायल और उनका खून बहने लगा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. वह खून में लथपथ सड़क पर मदद की गुहार लगाती रहीं.
पूरा मामला CCTV में कैद हुआ, कैब ने मदद की
CCTV फुटेज में साफ दिख रहा है कि पत्नी हाथ जोड़कर गुजरने वाली हर गाड़ी के आगे गुहार लगा रही थीं. कम से कम दो कारें, एक टेम्पो, एक बाइक और कई अन्य वाहन गुजरे, लेकिन कोई नहीं रुका. पत्नी ने बताया, ‘मैं खून से लथपथ थी, मदद मांग रही थी, लेकिन कोई नहीं आया. इंसानियत मेरे पति की मदद नहीं कर पाई.’
कई मिनट बाद एक कैब ड्राइवर रुका और वेंकटरमनन को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया. लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें पहुंचते ही मृत घोषित कर दिया.
दिल दहला देने वाली घटना पर परिवार का दर्द फूट पड़ा
वेंकटरमनन अपनी मां के आखिरी बेटे थे. पहले उनके पांच बच्चे गुजर चुके थे. मां ने कहा, ‘मेरे पास कहने को शब्द नहीं हैं. मेरा बेटा चला गया.’
वहीं, वेंकटरमनन की सास ने कहा, ‘सरकार को हेल्थ इमरजेंसी को समझना चाहिए. मेरी बहू दो छोटे बच्चों के साथ अकेली रह गई, अब उनका पालन-पोषण कौन करेगा?’
दुख की इस घड़ी में परिवार ने बड़ा फैसला लिया और वेंकटरमनन की आंखें डोनेट कर दीं। पत्नी ने कहा, ‘इंसानियत नाकाम रही, लेकिन हमने अपना फर्ज निभाया और उनकी आंखें डोनेट कर दीं.’ इससे दो लोगों को रोशनी मिलेगी. यह घटना बेंगलुरु में इमरजेंसी मेडिकल सुविधाओं की कमी और लोगों की उदासीनता पर बड़े सवाल उठा रही है. परिवार अब अकेला और असहाय महसूस कर रहा है.
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