Natural Disasters in 2025 Year Ender: साल 2025 में पूरी दुनिया में कुदरत का कहर झेला और सबसे ज्यादा भूकंपों ने धरती को दहलाया, लोगों को रुलाया, तबाही मचाई और जिंदगियां छिनीं. जहां यूरोप ने भयंकर हीटवेव से लोगों को दम तोड़ते देखा, वहीं धरती के अंदर जलजला आने से फटे ज्वालामुखी की भयावहता भी देखी. रूस में आए भूकंप के बाद जहां समुद्र देव ‘मौत’ बनकर लोगों पर टूटे, वहीं तिब्बत-रूस और म्यांमार में आए भूकंप ने उथल-पुथल मचाई. आइए साल 2025 में आईं प्राकृतिक आपदाओं के बारे में जानते हैं…
यूरोपीय हीटवेव 2025
साल 2025 की सबसे भयावह त्रासदी हीटवेव ने यूरोप के 29 देशों में अप्रैल से सितंबर (6 महीने) तक कहर बरपाया. अप्रैल में रिकॉर्ड तोड़ तापमान के साथ शुरू हुई हीटवेव ने 16500 लोगों को मौत की नींद सुलाया. तापमान 50 डिग्री तक पहुंच गया था. न केवल इंसान, बल्कि जानवरों ने भी भीषण गर्मी से तड़प-तड़प कर दम तोड़ा. कई देशों में जंगलों में आग लगी, जिससे प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचा. मानव जीवन के साथ पारिस्थितिक तंत्र भी प्रभावित हुआ. अल्बानिया, ऑस्ट्रिया, बेलोरूस, बोस्निया, हर्जेगोविना, बुल्गारिया, क्रोएशिया, एस्तोनिया, फ्रांस, फिनलैंड, जर्मनी, ग्रीस, आइसलैंड, आयरलैंड, इटली, लातविया, लिथुआनिया, उत्तरी मैसेडोनिया, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, रूस, सर्बिया, स्लोवेनिया, स्पेन, स्विट्जरलैंड, स्वीडन, टर्की, यूनाइटेड किंगडम 6 महीने हीटवेव की चपेट में रहे.
तिब्बत में भूकंप
नए साल के जश्न में डूबा भारत का पड़ोसी देश तिब्बत की धरती 7 से ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप से फट गई. धरती के नीचे 10 किलोमीटर की गहराई से पैदा हुई भूकंप की तरंगें भारत-नेपाल और भूटान-चीन तक धरती को दहलाती चली गईं. वहीं भूकंप ने चीन के कब्जे वाले तिब्बत के शिगात्से प्रान्त के शहर टिंगरी काउंटी में तबाही मचाई. करीब 400 लोगों के शव मिले और 30000 इमारतें ढह गईं और 5000 से ज्यादा घर ढह गए. 200 से ज्यादा गांव बर्बाद को गए. करीब 15 लाख लोगों से उनका आशियाना छिन गया. चीन ने मदद को हाथ बढ़ाए और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर लोगों को रिफ्यूजी कैंपों में शिफ्ट किया, लेकिन 7 जनवरी की सुबह जब दुनिया जागी तो तिब्बत में तबाही का मंजर देखकर दिल दहल गया.
म्यांमार में भूकंप
जनवरी में तिब्बत में तबाही मचाने के बाद भूकंप ने 28 मार्च 2025 को म्यांमार में दहशत फैलाई. 7.5 से 8 की तीव्रता वाले भूकंप के झटके भारत समेत थाईलैंड, दक्षिण-पश्चिमी चीन , वियतनाम तक महसूस किए गए. यह म्यांमार के इतिहास का दूसरा सबसे घातक भूकंप था, जिसने म्यांमार के साथ थाईलैंड में इमारतों को ध्वस्त किया और 5500 से ज्यादा लोगों की जान ली. अकेले म्यांमार में 5300 लोगों ने जान गंवाई. दोनों देशों ने इमरजेंसी घोषित करके बचाव अभियान चलाया. 120000 हजार घरों को नुकसान पहुंचा, जिनमें से 48000 से ज्यादा घर ढह गए और 1000 से ज्यादा सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचा. थाईलैंड में एक इमारत ढहने से मलबे के नीचे करीब 95 लोग दब गए थे, जिनकी लाशें बरामद हुईं.
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