
FII Fund Flows : US फेड ने इस बार की अपनी पॉलिसी मीट में बाजार को डबल क्रिसमस गिफ्ट दिया है। इसने दरों में 0.25 फीसदी की कटौती तो की ही है, साथ ही साथ इसने क्वांटिटेटिव ईजिंग (QUANTITATIVE EASING) की भी वापसी की है। इसके तहत सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए हर महीने 40 अरब डॉलर के ट्रेजरी बॉन्ड खरीदने का एलान किया है। हालांकि, US फेड ने 2026 और 2027 में सिर्फ एक-एक रेट कट के संकेत दिए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या इस कटौती के बाद FIIs भारत की तरफ फिर रुख करेंगे।
फेड के फैलसों का हमारे बाजारों पर क्या होगा असर?
इस पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि अगर US बाजार में क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) हो रहा है तो पैसा वहीं रहेगा। यहां FIIs की खरीदारी नहीं बल्कि बिकवाली और भी बड़ी हो सकती है। एक बात मान कर चलिए किअभी FIIs भारत नहीं आ रहे हैं। कोई कितना भी चिल्ला ले, FIIs को अभी भारत में इंटरेस्ट नहीं है। उनका बड़ा पैसा जहां अभी बन रहा है, वो वहीं रहेंगे। ऐसे में गैप अप में FII फिर बेचने आ जाएं तो हैरानी नहीं होगी।
सिर्फ गिफ्ट निफ्टी देखकर खुश होने की जरूरत नहीं है। हमारे लिए इससे बड़ा संकेत है US-भारत ट्रेड डील वार्ता। कल पीयूष गोयल की स्टेटमेंट से लग रहा है कि इसमें भी अभी समय लगेगा। ऐसे में बाजार में अनिश्चितता का माहौल रहेगा। जब तक निफ्टी वापस 26,000 के ऊपर बंद ना हो, निवेशकों का भरोसा नहीं लौटेगा। लेकिन अगर निफ्टी 26,000 के ऊपर बंद हुआ तो बड़ी रैली भी हो सकती है।
ज्यादा जोखिम लेकर ट्रेडिंग करने से बचें और इंट्राडे ही रहें
अनुज सिंघल की सलाह है कि इस समय ज्यादा जोखिम लेकर ट्रेडिंग करने से बचें और इंट्राडे ही रहें। बाजार आपको दोनों तरफ के मौके दे रहा है। जब तक बाजार में एक्सीडेंट हो रहे हैं,सेंटिमेंट कमजोर ही रहेगा। बाजार को 3-4 दिन बिना एक्सीडेंट और ठीक-ठाक ब्रेथ वाले चाहिए।
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