
आईटी कंपनियों के शेयरों में 9 दिसंबर को गिरावट आई। इसकी वजह 10 दिसंबर को फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी हो सकती है। इनवेस्टर्स फेड की पॉलिसी से पहले सावधानी बरत रहे हैं। आईटी शेयरों पर बिकवाली का दबाव दिखा। इससे निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.19 फीसदी गिरकर बंद हुआ। यह आईटी शेयरों पर दबाव का लगातार दूसरा दिन था।
10 दिसंबर को आएगी फेड की पॉलिसी
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व 10 दिसंबर को अपनी पॉलिसी पेश करेगा। भारत में देर रात फेड के फैसलों के बारे में पता चलेगा। अनुमान है कि फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल इंटरेस्ट रेट में 0.25 फीसदी कमी का ऐलान कर सकते हैं। फेड के इंटरेस्ट रेट में कमी करने का असर दुनियाभर के बाजारों पर पड़ेगा।
फेड की पॉलिसी से पहले इनवेस्टर्स सावधान
रेलिगेयर ब्रोकिंग में एसवीपी (रिसर्च) अजीत मिश्रा ने कहा, “फेड की पॉलिसी से पहले सेंटीमेंट थोड़ा कमजोर है। इनवेस्टर्स को फेड की पॉलिसी सख्त होने का अनुमान है। इसका असर उभरते बाजारों पर पड़ेगा।” इंडियन आईटी कंपनियों के रेवेन्यू में अमेरिका की बड़ी हिस्सेदारी है। इसलिए फेड की पॉलिसी का असर दिग्गज भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों पर पड़ सकता है।
ज्यादातर आईटी शेयरों पर बिकवाली का दबाव
सबसे ज्यादा 4 फीसदी की गिरावट Coforge के शेयरों में दिखी। यह 4.13 फीसदी गिरकर 1,870 रुपये पर बंद हुआ। टीसीएस, एचसीएल टेक, विप्रो और इंफोसिस के शेयरों में आधा फीसदी से लेकर करीब 2 फीसदी तक की गिरावट आई।
आईटी कंपनियों पर बड़े क्लाइंट्स के खर्च घटाने का असर
Vibhavangal Anukulakara के फाउंडर और एमडी सिद्धार्थ मौर्य ने कहा भारतीय आईटी कंपनियों पर बड़े ग्लोबल क्लाइंट्स के खर्च में कमी करने का असर पड़ा है। डील्स की संख्या में भी कमी देखने को मिली है। ग्लोबल इनवेस्टर्स इंडियन मार्केट्स में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। इसका असर भी आईटी कंपनियों के शेयरों पर पड़ा है।
निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स में भी आई गिरावट
इंडियन मार्केट्स के प्रमुख सूचकांकों में भी गिरावट देखने को मिली। निफ्टी 0.47 फीसदी गिरकर 25,839 पर आ गया। बीएसई सेंसेक्स 0.51 फीसदी की कमजोरी के साथ 84,666 पर बंद हुआ। इस हफ्ते दोनों सूचकांकों में करीब 1.2 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। इस महीने की शुरुआत में अपने लाइफ टाइम हाई से ये करीब 1.8 फीसदी नीचे आ चुके हैं।
फेड इंटरेस्ट रेट में 25 बीपीएस की कमी कर सकता है
एक्सपर्ट्स का कहना है कि 10 दिसंबर को फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट में कमी का ऐलान कर सकता है। लेकिन, अमेरिकी बैंकों का मानना है कि 2026 में फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट में ज्यादा कमी नहीं करेगा। इसकी बड़ी वजह इनफ्लेशन को लेकर चिंता है। अमेरिका में इंटरेस्ट रेट ज्यादा होने पर डॉलर को सपोर्ट मिलता है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से उभरते बाजारों में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी कम हो जाती है।
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