कभी एक्सपायर नहीं होते हैं ये 10 फूड! एक ही क्लिक में देख लें पूरी लिस्ट

शहद को तरल सोना कहा जाता है. इसमें पानी की मात्रा बहुत कम होती है, इसलिए किसी भी तरह के बैक्टीरिया इसमें पनप ही नहीं पाते, अगर शहद बिल्कुल शुद्ध है और उसमें कोई मिलावट नहीं है, तो यह सदियों तक सही रहता है. हजारों साल पुराने मिस्र के कब्रिस्तान में भी वैज्ञानिकों को खाने योग्य शहद मिला था.

शहद को तरल सोना कहा जाता है. इसमें पानी की मात्रा बहुत कम होती है, इसलिए किसी भी तरह के बैक्टीरिया इसमें पनप ही नहीं पाते, अगर शहद बिल्कुल शुद्ध है और उसमें कोई मिलावट नहीं है, तो यह सदियों तक सही रहता है. हजारों साल पुराने मिस्र के कब्रिस्तान में भी वैज्ञानिकों को खाने योग्य शहद मिला था.

नमक एक नेचुरल प्रिजर्वेटिव है, इसलिए यह कभी खराब नहीं होता है. अगर नमक में आयोडीन या एंटी-केकिंग एजेंट जैसे योजक न मिलाए जाएं, तो यह हमेशा के लिए सुरक्षित रहता है. समुद्र से निकला शुद्ध नमक अपना असली टेस्ट सालों तक बनाए रखता है.

नमक एक नेचुरल प्रिजर्वेटिव है, इसलिए यह कभी खराब नहीं होता है. अगर नमक में आयोडीन या एंटी-केकिंग एजेंट जैसे योजक न मिलाए जाएं, तो यह हमेशा के लिए सुरक्षित रहता है. समुद्र से निकला शुद्ध नमक अपना असली टेस्ट सालों तक बनाए रखता है.

चीनी भी नमक की तरह कभी खराब नहीं होती, क्योंकि इसमें नमी की मात्रा लगभग ना के बराबर होती है. समय के साथ यह सख्त जरूर हो सकती है, लेकिन आप इसे गर्म करके आसानी से दोबारा मुलायम बना सकते हैं. चीनी को बस नमी और कीड़ों से बचाकर रखें.

चीनी भी नमक की तरह कभी खराब नहीं होती, क्योंकि इसमें नमी की मात्रा लगभग ना के बराबर होती है. समय के साथ यह सख्त जरूर हो सकती है, लेकिन आप इसे गर्म करके आसानी से दोबारा मुलायम बना सकते हैं. चीनी को बस नमी और कीड़ों से बचाकर रखें.

अगर आप सफेद चावल को एयरटाइट कंटेनर में ठंडे और सूखे स्थान पर रखें, तो यह 25 से 30 साल या उससे भी ज्यादा समय तक सुरक्षित रहता है।.इसका कारण यह है कि सफेद चावल में तेल नहीं होते, इसलिए यह जल्दी खराब नहीं होते है.

अगर आप सफेद चावल को एयरटाइट कंटेनर में ठंडे और सूखे स्थान पर रखें, तो यह 25 से 30 साल या उससे भी ज्यादा समय तक सुरक्षित रहता है।.इसका कारण यह है कि सफेद चावल में तेल नहीं होते, इसलिए यह जल्दी खराब नहीं होते है.

सूखे बीन्स में लगभग सारी नमी निकाल दी जाती है, इसलिए यह दशकों तक ठीक रहते हैं. हालांकि, समय के साथ इन्हें पकने में थोड़ा ज़्यादा समय लग सकता है, लेकिन ये खाने के लिए सुरक्षित रहते हैं.

सूखे बीन्स में लगभग सारी नमी निकाल दी जाती है, इसलिए यह दशकों तक ठीक रहते हैं. हालांकि, समय के साथ इन्हें पकने में थोड़ा ज़्यादा समय लग सकता है, लेकिन ये खाने के लिए सुरक्षित रहते हैं.

सफेद सिरका बहुत तेज एसिडिक होता है. इसकी एसिडिक इसे कभी खराब होने ही नहीं देती, यह केमिकल रूप से स्थिर रहता है और सालों बाद भी इसका टेस्ट और क्वालिटी बिल्कुल वैसे ही रहते हैं. इसे सफाई से लेकर खाने तक कई तरीकों से यूज किया जा सकता है.

सफेद सिरका बहुत तेज एसिडिक होता है. इसकी एसिडिक इसे कभी खराब होने ही नहीं देती, यह केमिकल रूप से स्थिर रहता है और सालों बाद भी इसका टेस्ट और क्वालिटी बिल्कुल वैसे ही रहते हैं. इसे सफाई से लेकर खाने तक कई तरीकों से यूज किया जा सकता है.

कॉर्नस्टार्च में न फैट होता है, न प्रोटीन, यही कारण है कि यह कभी खराब नहीं होता है. इसे अगर एयरटाइट डिब्बे में नमी से दूर रखा जाए, तो यह हमेशा के लिए यूज एबल रहता है.

कॉर्नस्टार्च में न फैट होता है, न प्रोटीन, यही कारण है कि यह कभी खराब नहीं होता है. इसे अगर एयरटाइट डिब्बे में नमी से दूर रखा जाए, तो यह हमेशा के लिए यूज एबल रहता है.

इंस्टेंट कॉफी को बनाने के दौरान इसमें से पूरा पानी निकाल दिया जाता है. बिना नमी के यह खराब नहीं होती है. अगर इसे सही तरीके से पैक किया जाए, तो एक्सपायरी डेट निकल जाने के बाद भी अच्छी तरह पी जा सकती है, क्योंकि यह लंबे समय तक सुरक्षित रहती है.

इंस्टेंट कॉफी को बनाने के दौरान इसमें से पूरा पानी निकाल दिया जाता है. बिना नमी के यह खराब नहीं होती है. अगर इसे सही तरीके से पैक किया जाए, तो एक्सपायरी डेट निकल जाने के बाद भी अच्छी तरह पी जा सकती है, क्योंकि यह लंबे समय तक सुरक्षित रहती है.

फर्मेंटेशन की वजह से सोया सॉस बेहद लंबे समय तक खराब नहीं होती है. अगर इसमें कोई अतिरिक्त केमिकल या प्रिजर्वेटिव न मिलाया गया हो और बोतल बंद हो, तो यह दशकों तक सही रहती है. इसका टेस्ट भी लंबे समय तक वही रहता है.

फर्मेंटेशन की वजह से सोया सॉस बेहद लंबे समय तक खराब नहीं होती है. अगर इसमें कोई अतिरिक्त केमिकल या प्रिजर्वेटिव न मिलाया गया हो और बोतल बंद हो, तो यह दशकों तक सही रहती है. इसका टेस्ट भी लंबे समय तक वही रहता है.

व्हिस्की, रम, वोदका जैसी हार्ड ड्रिंक में अल्कोहल की मात्रा काफी ज्यादा होती है. यही अल्कोहल किसी भी तरह के जीवाणुओं को पनपने नहीं देता है. जब तक बोतल सीलबंद है, यह कभी खराब नहीं होती है. खोलने के बाद टेस्ट में हल्का बदलाव आ सकता है, लेकिन यह खराब नहीं होती है.

व्हिस्की, रम, वोदका जैसी हार्ड ड्रिंक में अल्कोहल की मात्रा काफी ज्यादा होती है. यही अल्कोहल किसी भी तरह के जीवाणुओं को पनपने नहीं देता है. जब तक बोतल सीलबंद है, यह कभी खराब नहीं होती है. खोलने के बाद टेस्ट में हल्का बदलाव आ सकता है, लेकिन यह खराब नहीं होती है.

Published at : 09 Dec 2025 07:07 PM (IST)

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