15 साल उम्र होते ही दिखने लगते हैं ये 5 लक्षण, इग्नोर करने वालों को हो जाता है यह कैंसर

दरअसल, बच्चों में कैंसर बहुत दुर्लभ होता है, इसलिए सामान्य बच्चों के लिए कोई रूटीन स्क्रीनिंग टेस्ट की सलाह नहीं दी जाती. लेकिन जिन बच्चों में जेनेटिक जोखिम होता है, उन्हें डॉक्टर जेनेटिक काउंसलिंग या टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं.

दरअसल, बच्चों में कैंसर बहुत दुर्लभ होता है, इसलिए सामान्य बच्चों के लिए कोई रूटीन स्क्रीनिंग टेस्ट की सलाह नहीं दी जाती. लेकिन जिन बच्चों में जेनेटिक जोखिम होता है, उन्हें डॉक्टर जेनेटिक काउंसलिंग या टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं.

अमेरिकन कैंसर सोसाइटी बच्चों में कैंसर के आम लक्षणों में गर्दन, सीने, बगल या पेट में नई गांठ या सूजन शामिल है. बिना वजह होने वाली बहुत ज्यादा थकान भी एक महत्वपूर्ण शुरुआती संकेत है.

अमेरिकन कैंसर सोसाइटी बच्चों में कैंसर के आम लक्षणों में गर्दन, सीने, बगल या पेट में नई गांठ या सूजन शामिल है. बिना वजह होने वाली बहुत ज्यादा थकान भी एक महत्वपूर्ण शुरुआती संकेत है.

बिना कारण चोट लगना, आसानी से खून बहना या रुकने में दिक्कत, बिना वजह दर्द होना, चलने में लड़खड़ाना या लंगड़ाना भी गंभीर बीमारियों के संकेत हो सकते हैं.

बिना कारण चोट लगना, आसानी से खून बहना या रुकने में दिक्कत, बिना वजह दर्द होना, चलने में लड़खड़ाना या लंगड़ाना भी गंभीर बीमारियों के संकेत हो सकते हैं.

अनजान बुखार, लंबे समय तक ठीक न होने वाली बीमारी, बार-बार सिरदर्द के साथ उल्टी, आंखों या नजर में अचानक बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आंख के बीच सफेद चमक दिखना भी एक चेतावनी है.

अनजान बुखार, लंबे समय तक ठीक न होने वाली बीमारी, बार-बार सिरदर्द के साथ उल्टी, आंखों या नजर में अचानक बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आंख के बीच सफेद चमक दिखना भी एक चेतावनी है.

बिना कोशिश के तेजी से वजन कम होना भी एक आम लक्षण है. हालांकि ये संकेत कई सामान्य बीमारियों में भी दिख सकते हैं, लेकिन अगर लक्षण लगातार बने रहें तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं.

बिना कोशिश के तेजी से वजन कम होना भी एक आम लक्षण है. हालांकि ये संकेत कई सामान्य बीमारियों में भी दिख सकते हैं, लेकिन अगर लक्षण लगातार बने रहें तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं.

डॉक्टर पहले बच्चे का मेडिकल हिस्ट्री  और लक्षण समझते हैं, फिर शारीरिक जांच करते हैं. जरूरत पड़ने पर वे ब्लड टेस्ट, इमेजिंग टेस्ट या गांठ होने पर बायोप्सी करवाकर उसकी जांच कर सकते हैं.

डॉक्टर पहले बच्चे का मेडिकल हिस्ट्री और लक्षण समझते हैं, फिर शारीरिक जांच करते हैं. जरूरत पड़ने पर वे ब्लड टेस्ट, इमेजिंग टेस्ट या गांठ होने पर बायोप्सी करवाकर उसकी जांच कर सकते हैं.

Published at : 08 Dec 2025 03:11 PM (IST)

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