Kodungallur Maa Kali Mandir: दक्षिण भारत देश का एक ऐसा हिस्सा जहां पौराणिक देवी-देवताओं से जुड़े अनेकों प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर हैं. केरल में स्थित एक देवी जो अपने हाथों में एक राक्षस का सिर पकड़े हुए हैं, और मान्यताएं हैं कि, वह मां काली का असल रूप है.
यह मंदिर केरल के कोडुंगल्लूर शहर के पास एक गांव में स्थित है, जो मां भगवती के मंदिर के लिए काफी प्रसिद्ध है.
मालाबार के 64 भद्रकाली मंदिर में में प्रमुख कोडुंगल्लूर
इस मंदिर को श्री कुरम्बा भगवती मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. यहां आने वाले भक्त मां भगवती को कुरम्बा या कोडुंगल्लूर अम्मा के नाम से बुलाते हैं. मां काली के इस मंदिर में उनके रुद्र रूप की पूजा की जाती है.
यह मालाबार के 64 भद्रकाली मंदिरों में से प्रमुख है, जहां मां काली ने प्रचण्ड रूप धारण कर अपने 8 हाथों में कुछ न कुछ पकड़ रखा है, जैसे कि, उनके एक हाथ में राक्षस दारूका का धड़ है, एक हाथ में घंटी, एक हाथ में तलवार और एक हाथ में अंगूठी है. मंदिर में दोपहर के 3 बजे से लेकर रात 10 बजे तक पूजा होती है.
कोडुंगल्लूर मंदिर का प्राचीन इतिहास
मान्यताओं के मुताबिक, प्राचीन समय में इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती थी. कुछ समय बाद परशुराम ने मंदिर के नजदीक ही मां काली की मूर्ति को स्थापित की. कोडुंगल्लूर शहर किसी जमाने में चेरा साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी. मं
दिर में लगे 5 ‘श्री चक्रों’ को शंकराचार्य द्वारा स्थापित किया गया था, जिन्हें देवी की शक्ति का प्रतीक माना जाता है. मंदिर में देवी काली को फूल अर्पित करने का अधिकार केवल यहां के पुजारी नंबूदिरीस और आदिकस के पास है.
प्राचीन समय में इस मंदिर में जानवरों की बलि देने की परंपरा निभाई जाती थी, जिसमें पक्षियों और बकरी की बलि दी जाती थी. मगर केरल सरकार के आदेश के बाद मंदिर में पशु बलि पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है. अब मंदिर में भगवान को लाल रंग की धोती अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है.
मंदिर में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार
केरल के प्रमुख त्योहारों में भरणी त्योहार भी शामिल है, जो हर साल मार्च और अप्रैल महीने के बीच मनाया जाता है. यह पर्व मुख्यता कोझिकलकु मूडल नामक अनुष्ठान से शुरू किया जाता है, जिसमें मुर्गों की बलि दी जाती है. इस त्योहार के जरिए मां काली को प्रसन्न किया जाता है.
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