
इंडिगो की पेरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों में 8 दिसंबर को 6.6 प्रतिशत तक की गिरावट दिखी। बीएसई पर शेयर 5012.05 रुपये के लेा तक गया। कंपनी का मार्केट कैप गिरकर 1.95 लाख करोड़ रुपये के करीब आ गया है। इंडिगो की फ्लाइट्स में पिछले 7 दिनों से चल रही दिक्कतों से हजारों यात्रियों को भारी परेशानी हुई है। इसके चलते शेयर को लेकर सेंटिमेंट बिगड़ा है। कई ब्रोकरेज ने एयरलाइन पर ऑपरेशनल प्रेशर और कॉस्ट प्रेशर बढ़ने की बात कही है।
इनवेस्टेक ने स्टॉक पर ‘सेल’ रेटिंग बनाए रखी है और प्राइस टारगेट ₹4040 रखा है। ब्रोकरेज ने चेतावनी दी है कि FY26 की पहली छमाही में कंपनी के कमजोर प्रदर्शन के बाद तीसरी तिमाही यानि अक्टूबर-दिसंबर 2025 में मजबूत रिकवरी की उम्मीदें कम हो रही हैं। ब्रोकरेज ने कहा कि एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतें तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 6% बढ़ी हैं। रुपया गिरकर 90 प्रति डॉलर के नए निचले स्तर को छू चुका है। इससे एयरलाइन पर लागत का बोझ बढ़ गया है। हाल ही में बड़े पैमाने पर फ्लाइट कैंसिल होने ने कमाई में सुधार की उम्मीदों को और कम कर दिया है।
पिछले लगातार 7 दिनों से इंडिगो की फ्लाइट बड़े पैमाने पर कैंसिल या रीशेड्यूल हुई हैं। इसके पीछे मुख्य वजह रिवाइज्ड फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियम हैं। हालांकि अब डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन ने इन नियमों में थोड़ी ढील दी है।
प्रति प्लेन लगभग 20% अधिक पायलटों की पड़ सकती है जरूरत
Indigo को 10 फरवरी, 2026 तक नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियमों का पूरी तरह से पालन करना होगा। इस बदलाव के लिए प्रति विमान लगभग 20% अधिक पायलटों की जरूरत हो सकती है। इनवेस्टेक का अनुमान है कि इससे लागत लगभग ₹0.10 प्रति उपलब्ध सीट किलोमीटर तक बढ़ सकती है। अगर इस बढ़ोतरी की भरपाई के लिए किराया नहीं बढ़ाया जाता है, तो रेवेन्यू प्रति उपलब्ध सीट किलोमीटर और लागत प्रति उपलब्ध सीट किलोमीटर के बीच ₹0.40 का अंतर आने का अनुमान है। इस अंतर के बेसिस पर इंडिगो का प्रॉफिट बिफोर टैक्स लगभग 25% कम हो सकता है।
UBS की रेटिंग और टारगेट
UBS ने इंडिगो के शेयर के लिए ‘बाय’ रेटिंग दी है। प्राइस टारगेट घटाकर ₹6350 कर दिया है। ब्रोकरेज ने कहा कि रिवाइज्ड ड्यूटी-टाइम नियमों के लिए अपर्याप्त तैयारी के कारण ऑपरेशंस में भारी व्यवधान पैदा हुआ है। UBS ने FY26 से लेकर FY28 के लिए इंडिगो को लेकर लागत के अनुमानों को बढ़ाया है ताकि अतिरिक्त क्रू की जरूरत और रुपये में गिरावट के कारण ऑपरेशंस के हाई खर्चों को शामिल किया जा सके। UBS का कहना है कि इंडिगो का लॉन्ग-टर्म ग्रोथ आउटलुक मजबूत बना हुआ है। यह अंतरराष्ट्रीय विस्तार के कारण है। मुख्य जोखिमों में परिचालन संकट से अचानक पैदा होने वाली कोई भी देनदारी और रुपये का और कमजोर होना शामिल है।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की राय
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने इंडिगो के शेयर पर ‘ऐड’ रेटिंग बरकरार रखी है। लेकिन प्राइस टारगेट पहले के ₹6400 से घटाकर ₹5700 कर दिया है। जेफरीज ने ‘बाय’ रेटिंग दी हुई है, प्राइस टारगेट ₹7025 प्रति शेयर है। ब्रोकरेज ने कहा कि इंडिगो नए ड्यूटी-टाइम नियमों से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। ये नए नियम पायलटों के ड्यूटी के घंटे कम करते हैं और क्रू की जरूरतें बढ़ाते हैं। नियमों में बदलाव, इंडिगो के क्षमता विस्तार, टेक्नोलॉजी की कमी और एयरपोर्ट पर भीड़भाड़ के कारण कई तरह की दिक्कतें आईं। एयरलाइन अब शेड्यूल को फिर से ठीक कर रही है और उम्मीद है कि दिसंबर के बीच तक ऑपरेशंस सामान्य हो जाएंगे।
कारण बताओ नोटिस पर जवाब देने के लिए DGCA ने दिया एक्स्ट्रा टाइम
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने शनिवार को इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स और जवाबदेही मैनेजर इस्द्रो पोर्क्वेरास को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। उन्हें प्लानिंग, निगरानी और रिसोर्स मैनेजमेंट में बड़ी कमियों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया। DGCA ने 24 घंटे का वक्त देते हुए कहा था कि बताएं कि उन उल्लंघनों के लिए कार्रवाई क्यों न की जाए, जिनके चलते देश में सालों बाद सबसे बड़ा एविएशन संकट आया। इंडिगो ने नोटिस का जवाब देने के लिए सोमवार शाम 6 बजे तक का वक्त मांगा, जिसे DGCA ने रविवार को ग्रांट कर दिया।
एल्बर्स ने रविवार को कर्मचारियों के लिए जारी इंटर्नल वीडियो मैसेज में कहा कि एयरलाइन धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रही है। उन्होंने कहा, “हम अब उड़ाने पहले चरण में ही रद्द कर रहे हैं, ताकि जिन यात्रियों की उड़ानें रद्द हो रही हैं, वे हवाई अड्डे पर न पहुंचें।” इंडिगो ने कैंसिल हुईं या अत्यधिक देरी से चली उड़ानों के लिए अब तक 610 करोड़ रुपये के रिफंड की प्रक्रिया पूरी कर ली है। शनिवार तक 3,000 नग सामान यात्रियों तक पहुंचा दिया गया।
Disclaimer:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Read More at hindi.moneycontrol.com