Makar Sankranti 2026: नया साल 2026 बस कुछ ही दिनों में आने वाला है. जिसमें कई पर्व आएंगे जिनको हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा. जिसमें से एक पर्व मकर संक्रांति भी है. हिंदू धर्म में यह त्योहार बहुत ही महत्वपूर्ण है. जब भी भगवान सूर्य अपनी राशि छोड़कर अपने पुत्र शनि देव की राशि में प्रवेश करते हैं, जो की मकर है, तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है.
हर साल जिस तिथि पर भगवान सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, उसी दिन मकर संक्रांति का पर्व भी मनाया जाता है. मगर आपको पता है इस पर्व का संबंध महाभारत काल से भी जोड़ा है. महाभारत के अनुसार भीष्म पितामह 58 दिनों तक बाणों की शैय्या पर लेटे हुए थे.
जिसके बाद उन्होंने अपने प्राण त्याग ने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया था. इससे जुड़ी एक पौराणिक कथा भी है, आइए जानते हैं.
नए साल 2026 में कब है मकर संक्रांति?
वैदिक पंचांग के मुताबिक, भगवान सूर्य 14 जनवरी को दोपहर के समय 3 बजकर 13 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे. जिस वजह से मकर संक्रांति का पर्व दोपहर से शुरू होगा. ऐसे में नए साल 2026 में 14 जनवरी, बुधवार के दिन ही यह पर्व मनाया जाएगा. मकर संक्रांति का स्नान-दान भी इसी दिन किया जाएगा.
क्या है पौराणिक कथा?
महाभारत का महान युद्ध कुल 18 दिनों तक चला था, जिसमें पांडवों की जीत हुई थी . शुरुआत के दस दिनों तक भीष्म पितामह कौरवों के प्रधान सेनापति रहे. उनके अद्भुत युद्ध कौशल और अपराजेय रणनीति ने पांडवों को गहरी चिंता में डाल दिया था. कोई भी योद्धा पितामह के सामने टीक नहीं पा रहा था.
आखिरकार, पांडवों ने शिखंडी की सहायता लेने का निर्णय किया, क्योंकि भीष्म ने प्रतिज्ञा की थी कि वे शिखंडी पर शस्त्र नहीं उठाएंगे. शिखंडी को सामने रखकर अर्जुन ने बाणों की ऐसी वर्षा की कि भीष्म पितामह बाणों की शैया पर आ गिरे.
फिर भी, उनकी मृत्यु तुरंत नहीं हुई, क्योंकि उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था. वे जानबूझकर मृत्यु का समय टालते रहे और सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा करते रहे. मान्यता है कि उत्तरायण में देह त्यागने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.
मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं, और इसी पवित्र समय की प्रतीक्षा में पितामह 58 दिनों तक बाणों की शैय्या पर जीवित रहे. उनका उद्देश्य था कि वे हस्तिनापुर को सुरक्षित और स्थिर देखकर ही जीवन यात्रा का पूर्ण विराम करें.
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