
डॉ बताते हैं कि 40 के बाद सबसे पहले नींद को गंभीरता से लेना चाहिए. सात से नौ घंटे की पूरी नींद न लेने पर दिमाग तेजी से बूढ़ा होता है, स्ट्रोक का रिस्क बढ़ जाता है और इम्यून सिस्टम कमजोर होने लगता है. खराब नींद शरीर की रिपेयरिंग को सीधे प्रभावित करती है.

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को नज़रअंदाज करना भी एक बड़ी गलती है। 40 की उम्र के बाद हर दशक में 3 से 5 प्रतिशत मांसपेशियां कम हो जाती हैं, इसलिए हफ्ते में दो दिन वेट ट्रेनिंग जरूरी है। इससे मेटाबॉलिज्म तेज होता है, हड्डियां मजबूत रहती हैं और दिल की बीमारियों का खतरा भी घटता है.

प्रोसेस्ड फूड 40 के बाद शरीर का सबसे बड़ा दुश्मन बन जाता है. चिप्स, केक, कुकीज़ और सोडा न सिर्फ वजन बढ़ाते हैं, बल्कि ब्लड शुगर को भी अस्थिर कर देते हैं. इनसे इंफ्लेमेशन बढ़ता है और दिल की बीमारी का खतरा दोगुना तक हो सकता है.

इस उम्र में बीमारी का इंतजार करना एक और भारी गलती है. साल में एक बार ब्लड टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल और थायरॉयड की जांच आपके कई छिपे जोखिमों को समय रहते पकड़ सकते हैं. शुरुआती पहचान से 20 प्रतिशत तक हार्ट-रिलेटेड मौतों का खतरा कम किया जा सकता है.

तनाव भी 40 की उम्र के बाद शरीर पर गहरा असर डालता है. लगातार तनाव से कोर्टिसोल बढ़ता है, जो हाई BP, डायबिटीज और याददाश्त कमजोर होने का कारण बनता है. तनाव शरीर के टेलोमीयर को भी छोटा करता है, जिससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज हो जाती है.

40 के बाद जरूरी है कि आप कम स्क्रीन टाइम रखें, समय पर सोएं और अपने खाने में रियल फूड शामिल करें. ये साधारण बदलाव आपकी ऊर्जा, मूड और सेहत, तीनों में बड़ा फर्क ला सकते हैं। यह लाइफस्टाइल न सिर्फ आज बल्कि आने वाले लंबे समय तक आपका साथ देती है.

डॉ का कहना है कि 40 के बाद शरीर को वही दें जो उसे चाहिए अच्छा खाना, सही व्यायाम, कम तनाव और भरपूर नींद. बस यह समझ लें कि छोटी-छोटी आदतें ही आपकी हेल्थ और लॉन्गेविटी तय करती हैं. अगर अब शुरुआत कर दी, तो आने वाले साल कहीं आसान और स्वस्थ हो सकते हैं.
Published at : 04 Dec 2025 04:19 PM (IST)
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