Colorectal Cancer: पॉटी ध्यान से देखने पर नजर आते हैं कोलोरेक्टल कैंसर के ये 4 लक्षण, 99 पर्सेंट लोग कर देते हैं इग्नोर


Colorectal Cancer Symptoms: कोलोरेक्टल कैंसर दुनिया भर में तेजी से एक गंभीर हेल्थ चैलेंज बनता जा रहा है. हैरानी की बात यह है कि अब सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि युवा उम्र के लोगों में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं. शुरुआती स्टेज में यह बीमारी ज्यादातर बिना किसी खास लक्षण के आगे बढ़ती है या फिर ऐसे हल्के बदलाव दिखाती है जिन्हें लोग सामान्य पेट की समस्या समझकर नजरअंदाज़ कर देते हैं. JAMA Network की एक स्टडी बताती है कि कुछ विशेष लक्षण शुरुआती उम्र में होने वाले कोलोरेक्टल कैंसर से गहराई से जुड़े होते हैं.

क्यों जरूरी है समय पर पहचान?

अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार, अगर कोलोरेक्टल कैंसर शुरुआती स्टेज में पकड़ा जाए और बीमारी शरीर के एक हिस्से तक सीमित हो, तो मरीज की 5 साल तक जीवित रहने की संभावना लगभग 90 प्रतिशत होती है. लेकिन जैसे-जैसे यह शरीर में फैलने लगता है, यह आंकड़ा तेजी से गिरता है. रीजनल स्टेज में लगभग 73 प्रतिशत और अगर कैंसर दूर तक फैल जाए तो सिर्फ 13 प्रतिशत इसलिए समय रहते पहचान बेहद जरूरी है.

शुरुआती पहचान ही इलाज 

अगर कोलोरेक्टल कैंसर सही समय पर पकड़ में आ जाए, तो इलाज के बेहतर विकल्प, कम रिकरेंस और पूरी तरह ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है. डॉक्टर बताते हैं कि कई शुरुआती संकेत आपको आपकी मल  में ही दिख सकते हैं. जानिए वे जरूरी लक्षण जिन्हें बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:

 स्टूल का पतला या पेंसिल जैसा दिखना

अगर आपकी मल अचानक से पतली, रिबन जैसी या पेंसिल जैसी होने लगे और यह बदलाव कई दिनों तक बना रहे, तो यह चेतावनी हो सकती है. अमेरिकन कैंसर सोसाइटी कहती है कि ऐसा तब होता है जब ट्यूमर आंतों के अंदरूनी हिस्से को संकरा कर देता है. Mayo Clinic के अनुसार, ऐसी स्थिति में स्टूल को बाहर आने के लिए कम जगह मिलती है, इसलिए वह पतला दिखने लगता है.

 मल में म्यूकस का दिखना

आंतें सामान्य रूप से थोड़ी मात्रा में म्यूकस बनाती हैं, लेकिन यदि यह मात्रा बढ़ जाए और स्टूल पर स्पष्ट रूप से चिपचिपा या जेल जैसा पदार्थ दिखाई दे, तो यह किसी समस्या का संकेत हो सकता है. NCBI की मेडिकल गाइडलाइन्स भी पीछे के रास्ते से म्यूकस या खून आने को एक चेतावनी संकेत मानती हैं.

 मल में खून आना

स्टूल में खून, चाहे चमकीला लाल हो या काला, इसको कोलोरेक्टल कैंसर का सबसे आम शुरुआती संकेत माना जाता है. रिसर्च के अनुसार, शुरुआती स्टेज के लगभग 50 से 60 प्रतिशत मरीजों में किसी न किसी रूप में ब्लीडिंग देखी जाती है. हालांकि पाइल्स, फिशर या संक्रमण से भी खून आ सकता है, लेकिन बार-बार या लगातार ब्लीडिंग को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए, खासकर जब दूसरे लक्षण भी दिखें.

लगातार दस्त या कब्ज लगा रहना

बार-बार दस्त लगना, कब्ज रहना या दोनों के बीच बार-बार बदलाव दिखना भी एक चेतावनी संकेत है. Moffitt Cancer Center का कहना है कि 50 साल से ऊपर के लोगों में लगातार ऐसी समस्या दिखे तो कोलोन की जांच जरूरी हो जाती है. यदि यह परेशानी कई दिनों या हफ्तों तक बनी रहे, तो समय रहते कोलोनोस्कोपी करवाना जरूरी है.

युवा भी बढ़ते जोखिम में क्यों आ रहे हैं?

The Lancet Oncology में प्रकाशित एक बड़े एनालिसिस से पता चला है कि 25 से 49 वर्ष की उम्र में कोलोरेक्टल कैंसर तेजी से बढ़ रहा है, और 50 में से 27 देशों में इसके मामले बढ़ते दिख रहे हैं. MDPI के अनुसार, शुरुआती उम्र में एंटीबायोटिक का ज्यादा इस्तेमाल, अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड, मोटापा और खराब जीवनशैली इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं. एक्सपर्ट का मानना है कि अगर लोग समय रहते स्क्रीनिंग और लाइफस्टाइल में सुधार पर ध्यान दें, तो बढ़ते मामलों को काफी हद तक रोका जा सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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