
क्या आपको भी यही लगता है कि, डेटिंग एक मॉर्डन कॉनसेप्ट है? ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. दरअसल आज से 2500 साल पहले से ही डेटिंग की अवधारणा चली आ रही है. कादंबरी, कामसूत्र और कथासरित सागर जैसे प्राचीन ग्रथों में उल्लेख है कि, शादी से पहले जोड़े साथ रहते थे और अपनी अनुकूलता (Compatibility) टेस्ट करते थे.

इस दौरान आदमी और औरतें पार्क, बगीचों, बाजारों या त्योहारों के दौरान मिला करते थे. वे एक दूसरे को तोहफे देते थे, और दोस्ती काफी बढ़ जाती थी. ताड़ के पत्तों पर हल्दी की स्याही से छुप छुपाकर प्रेम का इजहार करते थे, जो गर्म होने तक दिखाई नहीं देते थे.

लंबी दूरी के रिश्ते में बंधे प्रेमी-प्रेमिका एक दूसरे के लिए कविताएं लिखते थे और उन्हें मैसेंजर या पक्षी के द्वारा भेजते थे. ये सभी प्राचीन भारत में डेटिंग ऐप्स का काम करते थे. पुराने भारतीय रोमांस से डरने की बजाए इसका सम्मान करते थे, इसके सेलिब्रेट करते थे.

कामसूत्र के 70 प्रतिशत हिस्से में शारीरक की बजाए सामाजिक-मानसिक संबंधों पर बल जोर दिया गया है. इसमें कहा गया है कि, युवा को कैसे बात करनी चाहिए, कैसे अपने प्रेम को समझने और उसे विकसित करना चाहिए? यह ग्रंथ इस बात को साफ करता है कि, प्राचीन भारतीय सामाजिक और मानसिक विकास को समझता था.

हिंदू महाकाव्यों में भी प्यार की साफ झलक देखने को मिलती है. शंकुतला-दुष्यन्त, कृष्ण-रुक्मिणी, अर्जुन-उर्वशी, सुभद्रा-अभिमन्यु इन सभी के प्रेम संवाद पर कायम थे, न कि पारिवारिक फैसलों पर.

अगर डेटिंग को आधुनिक दौर में मिलने, बातचीत करने, आकर्षण बनाने और प्यार चुनने की प्रक्रिया माना जाए, तो भारत में यह परंपरा हजारों साल से चली आ रही है.गंधर्व विवाह, कामसूत्र, स्वयंवर इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं.
Published at : 25 Nov 2025 05:53 PM (IST)
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