Ayodhya Ram Mandir: रामनगरी अयोध्या में भक्ति का महा-शो, पुष्प और संस्कृति का हो रहा संगम

रामनगरी अयोध्या में धर्मध्वज की पूरी तैयारी कर ली गई है. वहां पर विवाह पंचमी के दिन मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज लगेगा. इसको लेकर अयोध्या में पुष्प और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा. देश के कई राज्यों से कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति देंगे. वहीं मंदिर और परिसर को सजाने के लिए विदेशों से भी फूल मंगाया गया है.

रामनगरी अयोध्या में धर्मध्वज की पूरी तैयारी कर ली गई है. वहां पर विवाह पंचमी के दिन मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज लगेगा. इसको लेकर अयोध्या में पुष्प और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा. देश के कई राज्यों से कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति देंगे. वहीं मंदिर और परिसर को सजाने के लिए विदेशों से भी फूल मंगाया गया है.

कार्यक्रम के दौरान भजन गायन से लेकर ब्रज की लोकधुनों तक प्रदेश के विविध अंचलों के कलाकार अपनी सांस्कृतिक धरोहर को सुरों के माध्यम से जीवंत करेंगे. शहनाई, सारंगी, पखावज, बांसुरी, सरोद और सितार की मधुर ध्वनियाँ वातावरण को आध्यात्मिक आभा से भर देंगी.

कार्यक्रम के दौरान भजन गायन से लेकर ब्रज की लोकधुनों तक प्रदेश के विविध अंचलों के कलाकार अपनी सांस्कृतिक धरोहर को सुरों के माध्यम से जीवंत करेंगे. शहनाई, सारंगी, पखावज, बांसुरी, सरोद और सितार की मधुर ध्वनियाँ वातावरण को आध्यात्मिक आभा से भर देंगी.

वर्तमान में राम मंदिर का दृश्य अद्भुत और अलौकिक लग रहा है. पूरा परिसर सैकड़ों तरह की फूलों से दमक रहा है. थाईलैंड और वियतनाम से आए दुर्लभ पुष्पों की सुगंध ने पूरे प्रांगण की दिव्यता दिख रही है. पूरी अयोध्या नगरी सुगंधित हो रही है. लिलियम, आर्किड, ट्यूलिप, दहेलिया और अन्य विदेशी फूल मिलकर मंदिर में अद्भुत छट बिखेर रहे हैं.

वर्तमान में राम मंदिर का दृश्य अद्भुत और अलौकिक लग रहा है. पूरा परिसर सैकड़ों तरह की फूलों से दमक रहा है. थाईलैंड और वियतनाम से आए दुर्लभ पुष्पों की सुगंध ने पूरे प्रांगण की दिव्यता दिख रही है. पूरी अयोध्या नगरी सुगंधित हो रही है. लिलियम, आर्किड, ट्यूलिप, दहेलिया और अन्य विदेशी फूल मिलकर मंदिर में अद्भुत छट बिखेर रहे हैं.

मंदिर परिसर की सजावट में 50 क्विंटल पुष्पों का प्रयोग किया गया है. वहीं आद्य शंकराचार्य, रामानंदाचार्य और माध्वाचार्य द्वारों को सजाने में 30 क्विंटल फूल उपयोग किए गए हैं. कुल मिलाकर लगभग 80 क्विंटल देशी और विदेशी पुष्पों से सम्पूर्ण परिसर को अलौकिक रूप प्रदान किया गया है.

मंदिर परिसर की सजावट में 50 क्विंटल पुष्पों का प्रयोग किया गया है. वहीं आद्य शंकराचार्य, रामानंदाचार्य और माध्वाचार्य द्वारों को सजाने में 30 क्विंटल फूल उपयोग किए गए हैं. कुल मिलाकर लगभग 80 क्विंटल देशी और विदेशी पुष्पों से सम्पूर्ण परिसर को अलौकिक रूप प्रदान किया गया है.

501 बटुक ब्राह्मणों के स्वस्ति वाचन से पूरी नगरी गूंज उठेगा. संत समागम से धार्मिक नगरी की गाथा वातावरण में बिखर रहा है. वहीं संत महंतों के शंखनाद और घंटे-घड़ियालों की पवित्र ध्वनियां पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देंगी.

501 बटुक ब्राह्मणों के स्वस्ति वाचन से पूरी नगरी गूंज उठेगा. संत समागम से धार्मिक नगरी की गाथा वातावरण में बिखर रहा है. वहीं संत महंतों के शंखनाद और घंटे-घड़ियालों की पवित्र ध्वनियां पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देंगी.

इस अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी. इसमें प्रदेश की विविध सांस्कृतिक छवियां एक साथ नजर आएंगी. मयूर, राई, फरूवाही, बधावा, अवधी, करमा, ढेढिया, धोबिया, कहरवा, वनटांगिया और बारहसिंहा जैसे लोकनृत्य इस आयोजन का मुख्य आकर्षण होंगे.

इस अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी. इसमें प्रदेश की विविध सांस्कृतिक छवियां एक साथ नजर आएंगी. मयूर, राई, फरूवाही, बधावा, अवधी, करमा, ढेढिया, धोबिया, कहरवा, वनटांगिया और बारहसिंहा जैसे लोकनृत्य इस आयोजन का मुख्य आकर्षण होंगे.

शास्त्रीय नृत्य की श्रेणी में कथक की प्रस्तुति दर्शकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र होगा. कई राज्यों के कलाकारों की कलाएं भक्तिमय वातावरण में चार चांद लगाएंगे और पूरा माहौल मनमोहक होगा.

शास्त्रीय नृत्य की श्रेणी में कथक की प्रस्तुति दर्शकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र होगा. कई राज्यों के कलाकारों की कलाएं भक्तिमय वातावरण में चार चांद लगाएंगे और पूरा माहौल मनमोहक होगा.

Published at : 25 Nov 2025 01:18 PM (IST)

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