शेयर बाजार में अब ये 2 थीम कराएंगे कमाई? UBS को भारी ग्रोथ की दिख रही उम्मीद – ubs identifies power equipment and defence as key drivers of india next capex wave

भारत के इंडस्ट्रियल कैपेक्स साइकल में अब एक नया रोटेशन दिख रहा है। ब्रोकरेज फर्म UBS का मानना है कि आने वाले सालों में पावर इक्विपमेंट वैल्यू चेन और डिफेंस सेक्टर में भारी ग्रोथ देखने को मिल सकती है। UBS के इंडिया इंडस्ट्रियल एनालिस्ट अमित महावर ने हमारे सहयोगी CNBC-TV18 के साथ एक बातचीत में इस ट्रेंड का विश्लेषण किया।

महावर ने कहा पिछले डेढ़ सालों के दौरान इंडस्ट्रियल कैपिटल एक्सपेंडिचर में कुछ नरमी जरूर आई है, लेकिन पावर इक्विपमेंट इकोसिस्टम में डिमांड बेहद मजबूत बनी हुई है। उन्होंने बताया कि केबल्स, ट्रांसफॉर्मर्स और स्विचगियर जैसे सेगमेंट लगातार सेहतमंद ऑर्डर इनफ्लो देख रहे हैं। इसमें घरेलू मांग के साथ-साथ ग्लोबल डिमांड भी मजबूत भूमिका निभा रही है।

उन्होंने कहा कि “ऑर्डरिंग मोमेंटम, शॉर्ट-साइकल इंडस्ट्रियल सेगमेंट्स की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत है, और यही अगले ग्रोथ साइकल का संकेत देता है।”

UBS का अनुमान है कि अगले 2–3 वर्षों में पावर जनरेशन इक्विपमेंट सबसे बड़ा पॉजिटिव सरप्राइज दे सकता है। इसमें थर्मल, विंड और सोलर, तीनों ही कैटेगरीज शामिल हैं।

महावर ने कहा कि ऑर्डर बुक बहुत मजबूत हैं, लेकिन जमीन पर एग्जिक्यूशन अभी तेजी नहीं पकड़ पाया है। पावर कैपेसिटी प्लानिंग लंबे समय के लिए होती है, इसलिए एग्जीक्यूशन ग्रोथ धीरे-धीरे तेज होगी।

उन्होंने एक महत्वपूर्ण पहलू पर जोर दिया कि भारत में पिछले 10–12 सालों से नई थर्मल पावर कैपेसिटी लगभग नहीं जुड़ी है। अब बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है और पीक-लोड जरूरतें भी बढ़ रही हैं। UBS को लगता है कि यह सेगमेंट अब कैच-अप फेज में प्रवेश करेगा।

साथ ही, विंड और सोलर में नीति-निर्माण और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग की सरकार की पहल इस ग्रोथ को और मजबूती दे रही है।

डिफेंस सेक्टर

डिफेंस सेक्टर को लेकर महावर ने कहा कि इस सेगमेंट में मौके अभी भी काफी मजबूत हैं। खासतौर पर टियर-1 इंटीग्रेटर्स और पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज के लिए। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, रडार जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में तेजी से फैसला लेने प्रक्रिया और बढ़ते ऑर्डर अगले सालों में ग्रोथ को बढ़ावा देंगे।

डिफेंस सेक्टर में सरकार आयात पर निर्भरता घटाने पर जोर दे रही है, जिसका फायदा अब टियर-2 और टियर-3 कंपनियों तक भी पहुंच रहा है। हालांकि, छोटे प्राइवेट प्लेयर्स के लिए उच्च वर्किंग कैपिटल अभी भी चुनौती है।

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर अस्थिर

महावर ने बताया कि इलेक्ट्रिकल कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (ECD) सेक्टर में मांग कमजोर है, प्रॉफिटेबिलिटी दबाव में है। इसके मुकाबले, केबल्स और वायर (Cables & Wires) जैसे B2B सेगमेंट बेहतरीन प्रदर्शन कर रहा है। इसके पीछे उन्होंने मजबूत एक्सपोर्ट ग्रोथ, भारतीय कंपनियों की ग्लोबली प्रतिस्पर्धी क्षमता और पावर इक्विपमेंट ग्रोथ साइकिल का बड़ा लाभ जैसे कारण गिनाए हैं।

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