Bihar Bhumi: शासन बदला…सत्ता बदली, नहीं बदला तो बिहार का ये रूप


Bihar: चुनाव या चुनावी नतीजों का समय आते ही विभिन्न पार्टियों और सत्ता की चर्चा तेज हो जाती है. लेकिन बिहार के बारे में बात करें तो, इसकी जड़ें धर्म और परंपरा में गहराई तक मिलती है. बिहार सदियों से बहुधार्मिक संस्कृति की जीवंत भूमि रही है.

बिहार में हिंदू धर्म के पावन स्थलों के साथ बौद्ध धर्म की महाबोधि परंपरा, जैन धर्म के तीर्थंकरों की जन्मभूमि, सिख धर्म की पवित्र स्मृतियां और इस्लामी-सूफी परंपराओं की दरगाहें एक साथ देखी जाती हैं. बिहार की धरती हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख धर्म समेत इस्लामी और सूफी परंपराओं के संगम से फली-फूली है. बिहार का इतिहास इसकी समृद्ध धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रमाण है.

तीर्थ और तप की पवित्र भूमि- हिंदू धर्म की दृष्टि से बिहार कई महत्वपूर्ण तीर्थों का केंद्र रहा है. गया में पिंडदान की परंपरा विश्वभर में प्रसिद्ध है. वैशाली, दरभंगा, पटना और मुंगेर जैसे क्षेत्र विविध धर्मस्थलों और पुराणों में वर्णित पवित्र स्थलों से भरे हैं. गया का विष्णुपद मंदिर, पूर्णिया का काली स्थान, मधुबनी के प्राचीन शिवालय और मुंगेर का योगिक इतिहास बिहार को अद्वितीय बनाते हैं.

बौद्ध धर्म का वैश्विक केंद्र है बिहार- बिहार को दुनियाभर में प्रसिद्ध बनाने वाला सबसे बड़ा अध्याय है बौद्ध धर्म. बोधगया जहां गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ और यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थों में एक बना. गया, राजगीर, नालंदा और वैशाली बुद्ध के जीवन से जुड़े प्रमुख स्थान रहे.

जैन परंपरा में बिहार का स्थान- जैन परंपरा भी बिहार से गहराई से जुड़ी है. भगवान महावीर का जन्म वैशाली में हुआ था, जो जैन धर्म के लिए एक तीर्थस्थल है. राजगीर, पावापुरी और चंपारण जैन धर्म की तप, त्याग और मोक्ष परंपरा के प्रमुख केंद्र रहे हैं.

सिख परंपरा का केंद्र पटना साहिब- सिख धर्म के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म पटना साहिब में हुआ. तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब दुनिया के पांच तख्तों में से एक है.

इस्लामी और सूफी परंपरा की जड़े भी बिहार में- बिहार इस्लामी विद्या और सूफी संस्कृति का भी एक बड़ा केंद्र रहा है. मनेर शरीफ, बिहार शरीफ, जहानाबाद और पटना के सूफी दरगाह सूफी संतों की दरगाहें हिंदू-मुस्लिम एकता और प्रेम के प्रतीक माने जाते हैं.

शासन सत्ता बदल रही लेकिन नहीं बदली बिहार की आध्यात्मिक धारा

भागवत परंपरा से लेकर बौद्ध ध्यान, महावीर की अहिंसा से लेकर गुरु गोविंद सिंह की वीरता और सूफी संतों की करुणा तक, बिहार की संस्कृति बताती है कि यहां भले ही शासन-सत्ता बदल सकता है, लेकिन आध्यात्मिकता की धारा कभी नहीं. इसलिए चुनावी परिणाम चाहे कुछ भी हों, लेकिन बिहार का मूल स्वभाव यही सिखाता है कि यहां धर्म का अर्थ किसी एक मत का वर्चस्व नहीं, बल्कि विविध परंपराओं का सामंजस्य है.  

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