राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर में ‘खतरनाक’ स्तर तक पहुंचे प्रदूषण को लेकर आज नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने उग्र प्रदर्शन किया. सैंकड़ों छात्रों और युवाओं ने सिविल लाइन्स स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरना दिया और दिल्ली सरकार की नीतियों व “निष्क्रियता” के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ऑक्सीजन सिलिंडर और मास्क पहन कर सांकेतिक विरोध जताने पहुंचे. वे मुख्यमंत्री आवास के बाहर सड़क पर लेट गए और दिल्ली की हवा को “गैस चेंबर” करार दिया.
Delhi’s air is poison — AQI 800+, the worst in the world.
Hundreds of GenZ and youth, led by NSUI National President Shri @varunchoudhary2, protested outside the CM’s residence demanding urgent action on Delhi’s toxic air.
Clean Air is our Basic Right.
People are dying,… pic.twitter.com/0aEwR3Vz6N
— NSUI (@nsui) November 10, 2025
‘सरकार के पास कोई विजन नहीं’
वरुण चौधरी ने कहा, “दिल्ली की हवा अब ‘गैस चेंबर’ बन चुकी है और सरकार के पास इस संकट से निपटने के लिए कोई ठोस योजना या विज़न नहीं है. बच्चों से लेकर बुज़ुर्ग तक सांस नहीं ले पा रहे. यह सरकार की नाकामी है.” उन्होंने बताया कि संगठन ने मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा था, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.
पोस्टर और तीखे सवाल
प्रदर्शन में मौजूद युवाओं ने हाथों में पोस्टर लेकर अपनी नाराज़गी जताई, जिन पर लिखा था— “Right to Live”, “I Miss Breathing”, और “Dear CM, Smog is not a season”.
प्रदर्शनकारी छात्रों ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उन्हें “IQ और AQI का फर्क तक नहीं पता”, और इसी कारण सरकार कोई कठोर कदम नहीं उठा पा रही है. NSUI का कहना है कि अगर सरकार गंभीर होती, तो अब तक स्पष्ट एडवाइजरी और रोडमैप जारी हो जाना चाहिए था.
दिल्ली और केंद्र, दोनों पर साधा निशाना
NSUI ने आरोप लगाया कि दिल्ली और केंद्र—दोनों ही सरकारें इस गंभीर प्रदूषण संकट की ज़िम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल रही हैं, जबकि कोई भी ठोस पहल नहीं कर रहा. संगठन ने दोनों सरकारों से मिलकर तुरंत एक ‘संयुक्त आपातकालीन कार्ययोजना’ (Joint Emergency Response Plan) बनाने की मांग की, ताकि हवा की गुणवत्ता में जल्दी सुधार हो सके.
वरुण चौधरी ने चेतावनी देते हुए कहा, “यह केवल राजनीति का मुद्दा नहीं है, यह हमारे ‘Right to Breathe’ (सांस लेने का अधिकार) और ‘Right to Life’ (जीने का अधिकार) का सवाल है. जब तक मुख्यमंत्री हमसे मिलकर कोई ठोस जवाब नहीं देंगी, हम यही धरने पर बैठे रहेंगे.”
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