
सेबी ने 8 नवंबर को अल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट फंड (एआईएफ) में निवेशकों के निवेश के अनुपात में उनके अधिकार पर एक ड्राफ्ट सर्कुलर जारी किया। मार्केट रेगुलेटर ने इसमें कहा है कि क्लोज्ड-एंडेड एआईएफ स्कीम में इनवेस्टमेंट प्रोसिड्स के डिस्ट्रिब्यूशन के मामले में इनवेस्टर के अधिकार उसके टोटल कमिटमेंट या अनड्रॉन कमिटमेंट पर आधारित होने चाहिए।
इस ड्राफ्ट सर्कुलर में कहा गया है, “AIF स्कीम के इनवेस्टर्स का ऐसे इनवेस्टमेंट में उसके कंट्रिब्यूशन के प्रो-राटा (pro-rata) बेसिस पर प्रोसिड्स के डिस्ट्रिब्यूशन में अधिकार होगा। या टाइम वेटेड प्रो-राटा बेसिस पर ऐसे इनवेस्टमेंट में उसके कंट्रिब्यूशन के प्रो-राटा पर होगा, जैसा कि स्कीम के पीपीएम में इनवेस्टर्स को इस बारे में अपफ्रंट बताया जाएगा।”
रेगुलेटर ने कहा है कि स्कीम को स्पष्ट रूप से अपफ्रंट यह बताना होगा कि प्रो-राटा राइट्स का कैलकुलेशन किस तरह होता है और टेन्यर (tenure) के दौरान इस मेथड में बदलाव नहीं किया जा सकेगा। ऐसे इनवेस्टर्स जो किसी खास इनवेस्टमेंट में शामिल नहीं होंगे उनके पास किसी दूसरी जगह इस्तेमाल किए गए अनयूज्ड कमिटमेंट नहीं होंगे। यह तरीका किसी इनवेस्टर को तय कंसंट्रेशन लिमिट से ज्यादा किसी इनवेस्टी कंपनी में एक्सेसिव स्टेक लेने से रोकेगा।
मौजूदा एआईएफ स्कीम कंप्लायंट होने पर अपने मौजूदा मेथड को जारी रख सकेंगे। लेकिन, जो अलग मेथड का इस्तेमाल करते हैं उन्हें फ्यूचर इनवेस्टमेंट्स की नई गाइडलाइंस का पालन करना होगा। ओपन-एंडेड कैटेगरी III AIF जहां इनवेस्टर मुक्त रूप से एंटर या एग्जिट कर सकता है, उनमें इनवेस्टर को प्रो-राटा ड्राउन के लिए अप्लाई नहीं करना होगा। लेकिन, प्रोसिड्स को उसके पास मौजूदा यूनिट्स के अनुपात में डिस्ट्रिब्यूट करना होगा।
हालांकि, अगर ऐसी स्कीम अनलिस्टेड सिक्योरिटीज में इनवेस्ट करती है तो उन्हें उसी नियमों का पालन करना होगा, जिसका इस्तेमाल क्लोज्ड-एंडेड स्कीम करती हैं। 13 दिसंबर, 2024 से पहले किए गए निवेश में डिस्ट्रिब्यूटर्स को उन शर्तों का पालन करना होगा, जिसके बारे में उन्होंने इनवेस्टर्स को पहले बताया होगा। इस सर्कुलर में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इनवेस्टर्स की तरफ से फंड मैनेजर्स के साथ शेयर किए गए कैरिड इंटरेस्ट जैसे प्रॉफिट प्रो-राटा रिक्वायरमेंट के दायरे से बाहर होंगे।
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