
शनिवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. मन में शनिदेव के प्रति श्रद्धा, सेवा भाव रखकर दिन की शुरुआत करें.

पूजा स्थान पर काले कपड़े पर शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. अगर प्रतिमा नहीं हो तो सुपारी को प्रतीक रूप में रख सकते हैं.

शनिदेव को नीले फूल, काजल, सिंदूर और अक्षत अर्पित करें. इसके बाद पंचामृत से अभिषेक करें और सरसों के तेल का दीपक जलाएं.

फल, मिठाई या उड़द दाल की खिचड़ी का भोग लगाएं. भोग के बाद जरूरतमंदों को अन्न या उड़द दाल का दान करें.

“ॐ शं शनैश्चराय नमः” या “ॐ नीलांजन समाभास” मंत्र का जाप करें. शनि चालीसा, हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें.

पीपल के पेड़ पर काले तिल और गंगाजल चढ़ाएं. उसकी तीन या सात बार परिक्रमा करें. यह अत्यंत शुभ माना गया है.
Published at : 08 Nov 2025 08:01 AM (IST)
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