Saturday Worship: शनिवार को करें हनुमान चालीसा का पाठ, रक्षा और तरक्की का मिलेगा आशीर्वाद

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Saturday Worship: शनिवार का दिन हनुमान जी को समर्पित है. इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और आपको तरक्की और सुरक्षा का आशीर्वाद भी मिलता है.

मान्यता है कि हनुमान चालीसा का सात बार पाठ करना अत्यंत शुभ है. चालीसा में लिखा है— “जो सत बार पाठ कर कोई, छूटहि बन्दि महा सुख होई.”
अर्थात, जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से सात बार इसका पाठ करता है, उसके जीवन के सभी संकट, भय और दुख दूर हो जाते हैं.

इस उपाय से जीवन में सुख-शांति और आत्मविश्वास दोनों बढ़ते हैं. अगर चाहें तो मंगलवार के दिन भी सात बार पाठ कर सकते हैं. यह भी समान रूप से फलदायी होता है.

सात बार पाठ नहीं होने पर करें यह उपाय

अगर किसी कारणवश आप सात बार पाठ नहीं कर पाते, तो चिंता की बात नहीं.

शास्त्रों में इसका सरल उपाय बताया गया है. आप सुबह और शाम, दिन में दो बार हनुमान चालीसा का पाठ करें. इससे भी आपको फल प्राप्त होगा. यदि दिन में दो बार भी संभव न हो, तो शाम के समय आठ बजे एक लाल दीपक जलाएं.

उसके सामने बैठकर एकाग्र मन से हनुमान चालीसा का पाठ करें. मान्यता है कि इसे लगातार 40 दिनों तक करने से जीवन में स्थिरता, सुरक्षा और सफलता प्राप्त होती है.

शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करने से शनि का अशुभ प्रभाव कम हो जाते है. हनुमान जी की कृपा से भय, रोग और रुकावटों से मुक्ति मिलती है.

नियमित रूप से शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करने से जीवन में प्रगति का मार्ग खुलता है. कहा जाता है जहां हनुमान चालीसा का पाठ होता है. वहां नकारात्मक प्रभाव नहीं टिक पाता है.

हनुमान चालीसा का पाठ करने का नियम

पाठ आरंभ करने से पहले लाल रंग का वस्त्र धारण करें और भगवान श्रीराम का ध्यान करें.

पाठ के समय मौन रहें और उसे जल्दबाज़ी में न करें. काले वस्त्र पहनने से बचें और मन में किसी भी प्रकार का नकारात्मक या अपवित्र विचार न लाएं.

शुद्ध और पवित्र अवस्था में ही पाठ करें तथा पूजा की पवित्रता का विशेष ध्यान रखें. अंत में, पाठ के दौरान हुई किसी भी भूल या त्रुटि के लिए प्रभु से क्षमा याचना करें.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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