Utpanna Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में उत्पन्ना एकादशी का अत्यधिक धार्मिक महत्व माना गया है. हर वर्ष मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन यह पवित्र एकादशी मनाई जाती है. इस वर्ष उत्पन्ना एकादशी 15 नवंबर 2025, शुक्रवार को मनाई जाएगी.
ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा के अनुसार, वैदिक पंचांग के मुताबिक 14 नवंबर की रात 12:49 बजे अगहन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि आरंभ होगी, और 15 नवंबर की रात 02:37 बजे समाप्त होगी. चूंकि सनातन धर्म में उदया तिथि से गणना की जाती है, इसलिए उत्पन्ना एकादशी का व्रत 15 नवंबर को रखा जाएगा.
उत्पन्ना एकादशी का महत्व:
मार्गशीर्ष या अगहन माह को भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप माना जाता है. इस कारण इस दिन श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा विशेष फलदायी होती है. मान्यता है कि भगवान विष्णु के प्रति समर्पित व्रत और पूजा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी विशिष्ट इच्छा की पूर्ति के लिए एकादशी का व्रत करता है, तो उसमें भी सफलता मिलती है. एकादशी पर किसी पवित्र नदी में स्नान, दान-पुण्य और रात्रि जागरण का विशेष महत्व बताया गया है.
व्रत और पूजा विधि:
एकादशी के एक दिन पूर्व, अर्थात दशमी तिथि को, शाम के भोजन के बाद दंतधावन (दातुन) करें ताकि मुंह में अन्न का अंश न रहे. इसके बाद कुछ भी न खाएं और वाणी पर संयम रखें.
एकादशी की सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें. भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की धूप, दीप, नैवेद्य और सोलह उपचरों से पूजा करें. दिनभर निराहार रहें या फलाहार करें. रात्रि में दीपदान करें, भजन-कीर्तन करें और सोएं नहीं. अगले दिन ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान देने के बाद ही स्वयं भोजन करें.
स्कंद पुराण में वर्णित महत्व:
स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में एकादशी व्रत के महत्व का वर्णन मिलता है. एक वर्ष में कुल 24 एकादशियां होती हैं, जबकि अधिकमास वर्ष में 26 एकादशियां होती हैं.
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को एकादशी के महत्व के बारे में बताया था. जो भक्त एकादशी व्रत करते हैं, उन्हें अक्षय पुण्य प्राप्त होता है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
इस दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप शुभ फल देता है. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों का अभिषेक करें, पीले वस्त्र अर्पित करें और तुलसी-पत्तों के साथ मौसमी फलों का भोग लगाएं.
बाल गोपाल का अभिषेक विधि:
- नीतिका शर्मा के अनुसार, एकादशी की पूजा गणेश पूजन से प्रारंभ करनी चाहिए. गणेश जी को जल, वस्त्र, फूल, चंदन, दूर्वा और लड्डू का भोग लगाएं.
- इसके बाद श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल का अभिषेक करें. गुलाब, मोगरा आदि सुगंधित फूलों की पंखुड़ियों से मिश्रित जल को दक्षिणावर्ती शंख में भरकर अभिषेक करें.
- भगवान को पीले चमकीले वस्त्र पहनाएं, मोरपंख का मुकुट लगाएं और माखन-मिश्री का भोग लगाएं. पूजा के दौरान “कृं कृष्णाय नमः” मंत्र का जाप करें.
उत्पन्ना एकादशी की उत्पत्ति:
पद्म पुराण के अनुसार, मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु से एकादशी देवी की उत्पत्ति हुई थी. इसलिए इस तिथि को “उत्पन्ना एकादशी”, “उत्पत्तिका एकादशी” या “प्राकट्य एकादशी” कहा जाता है.
इस व्रत को सभी व्रतों में सर्वोत्तम और सिद्धिदायक माना गया है.
इस दिन किए जा सकते हैं ये शुभ कार्य
- भगवान शिव की पूजा करें, शिवलिंग पर जल, दूध और बिल्व पत्र चढ़ाएं.
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें और दीपक जलाएं.
- हनुमान जी के समक्ष दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें.
- बाल गोपाल की मूर्ति के सामने तुलसी के साथ माखन-मिश्री का भोग लगाएं.
राशि अनुसार भगवान विष्णु को अर्पित करें ये वस्तुएं:
मेष राशि: लड्डू का भोग लगाना चाहिए.
वृषभ राशि: पंचामृत चढ़ाना चाहिए.
मिथुन राशि: हरे रंग का वस्त्र अर्पित करना चाहिए.
कर्क राशि: खीर का भोग लगाना चाहिए.
सिंह राशि: लाल रंग के वस्त्र को चढ़ाना चाहिए.
कन्या राशि: मोर का पंख चढ़ाना चाहिए.
तुला राशि:कामधेनु गाय की प्रतिमा अर्पित करनी चाहिए.
वृश्चिक राशि: गुड़ का भोग लगाना चाहिए.
धनु राशि: हल्दी का तिलक लगाना चाहिए.
मकर राशि: कमल के फूल चढ़ाने चाहिए.
कुंभ राशि: शमी के पत्ते चढ़ाने चाहिए.
मीन राशि: चंदन का तिलक लगाना चाहिए.
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