इन 5 शेयरों से विदेशी निवेशकों ने किया किनारा, सितंबर तिमाही में बेचे कुल ₹82,000 करोड़ के शेयर – foreign investors sold rs 82000 crore worth of shares in q2 cut stakes most in these 5 stocks

शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) लगातार पैसे निकाल रहे हैं। ये बात तो सभी को पता है। लेकिन वे किन शेयरों से पैसे निकाल रहे हैं, क्या ये आपको पता है? पूरे सितंबर तिमाही में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 9.3 अरब डॉलर, यानी लगभग 82,400 करोड़ रुपये, निकाले हैं। विदेशी निवेशक आखिर यह बिकवाली क्यों कर रहे हैं? वे कौन से टॉप-5 स्टॉक्स हैं, जहां विदेशी निवेशकों ने सबसे अधिक बिकवाली की है।

विदेशी निवेशकों ने सितंबर तिमाही के दौरान जिन 5 शेयरों को सबसे अधिक बेचा है, उनमें सोना BLW प्रीसिजन फोर्जिंग्स, PNB हाउसिंग फाइनेंस, सम्मान कैपिटल, इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) और कंप्यूटर एज मैनेजमेंट सर्विसेज (CAMS) के शेयर शामिल हैं। विदेशी निवेशकों ने तीन महीने,यानी जुलाई से सितंबर तिमाही के दौरान इन पांचों कंपनियों में 5 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सेदारी घटाई है।

सबसे बड़ी गिरावट सोना BLW प्रीसिजन फोर्जिंग्स में देखने को मिली, जहां FPI की हिस्सेदारी जून 2025 के अंत में लगभग 30% से घटकर 23.5% रह गई। यानी करीब 7.5 फीसदी की गिरावट। पिछले एक साल में इस कंपनी में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 10.1 फीसदी घटी है। इसके अलावा PNB हाउसिंग फाइनेंस में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 24.2% से घटकर 18.6% पर आ गई है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी निवेशकों ने सबसे पहले भारतीय शेयर बाजार के ऊंचे वैल्यूएशन के कारण शेयर बेचना शुरू किया था। लेकिन इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी आई, जिसने विदेशी निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है। इसके चलते उन्होंने अपनी बिकवाली भी तेज कर दी थी।

हालांकि, अक्टूबर से विदेशी निवेशकों ने फिर से थोड़ी खरीदारी शुरू की है, और करीब 55 करोड़ डॉलर के शेयर खरीदे हैं। लेकिन पिछले 7 दिनों से एक बार फिर से बिकवाली शुरू कर दी है। यानी अभी तक विदेशी निवेशकों के लौटने के ठोस संकेत नहीं मिल रहे हैं।

ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार अभी भी एशिया के दूसरे शेयर बाजारों की तुलना में ऊंचे वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं। निफ्टी का वन-ईयर फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो 20.4 गुना है, जबकि इसी ताइवान का TAIEX इंडेक्स का 18 गुना, कोरिया का Kospi इंडेक्स 11 गुना और चीन का CSI300 इंडेक्स 14.7 गुना पर कारोबार कर रहा है।

वैसे मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आगे चलकर विदेशी निवेशक फिर से भारतीय बाजार में वापसी कर सकते हैं। मॉर्गन स्टैनली इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर ऋद्धम देसाई का कहना है कि “भारत के वैल्यूएशन अब ऐतिहासिक रूप से आकर्षक स्तरों पर आ गए हैं, जिससे अगले 12 महीनों में विदेशी निवेशकों के नेट बायर यानी शुद्ध खरीदार बनने की संभावना मजबूत है।”

वहीं एक्सिस बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट और एक्सिस कैपिटल के ग्लोबल रिसर्च हेड नीलकंठ मिश्रा का कहना है कि “कई हेज फंड फिलहाल भारतीय शेयरों को बेचकर दूसरे बाजारों में पैसे ट्रांसफर कर रहे हैं।”

साल 2025 की शुरुआत से अब तक विदेशी निवेशकों ने कुल 16.5 अरब डॉलर के भारतीय शेयर बेचे हैं। इसकी बाकी देशों से तुलना करें तो, ताइवान में उन्होंने इसी दौरान 1.3 अरब डॉलर की नेट खरीदारी की। वहीं साउथ कोरिया में उन्होंने 1.7 अरब डॉलर, थाईलैंड में 3 अरब डॉलर और वियतनाम में 4.6 अरब डॉलर के शेयर बेचे हैं, जो भारते के मुकाबले काफी कम है।

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