बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की हिंसक और चरमपंथी नीतियां भारत के साथ तनाव के लिए जिम्मेदार हैं और अवामी लीग के समर्थक आगामी चुनाव में वोट नहीं देंगे, क्योंकि पार्टी पर प्रतिबंध देश के संविधान का उल्लंघन करता है.
भारत में निर्वासन में रह रहीं शेख हसीना ने गुरुवार (6 नवंबर) को हिंदुस्तान टाइम्स को भेजे ई-मेल में कहा कि यूनुस के अपनी सरकार में चरमपंथियों को प्रायोजित करने से बांग्लादेश और भारत के बीच बुनियादी रिश्तों को नुकसान पहुंचने का खतरा है. उन्होंने कहा कि मुझे सुरक्षित पनाह देने के लिए मैं भारतीयों की बहुत आभारी हूं.
‘भारत-बांग्लादेश का सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी रहा है’
शेख हसीना से पूछे गए सवाल, बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने भारत में आपकी उपस्थिति को द्विपक्षीय संबंधों में तनाव का एक कारण बताया है, इस पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि भारत-बांग्लादेश का सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी रहा है और हमेशा से रहा है. अगर बांग्लादेश की सुरक्षा और समृद्धि को बनाए रखना है तो उसे ऐसा ही रहना होगा. अगर भारत और डॉ. यूनुस के अनिर्वाचित प्रशासन के बीच कोई मतभेद है, तो इसका मुझसे कोई लेना-देना नहीं है. इसका संबंध डॉ. यूनुस के शासन में पनप रही अराजक, हिंसक और अतिवादी नीतियों से है.
अपने ऊपर लगे आरोपों पर क्या बोलीं?
बांग्लादेश का अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण आपके और अवामी लीग के अन्य वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ दर्ज मानवता के विरुद्ध अपराधों से संबंधित मामलों में नवंबर में अपना फैसला सुनाएगा, आप अपने खिलाफ इन मामलों को कैसे देखती हैं? इस पर जवाब देते हुए शेख हसीना ने कहा कि मैं अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का स्पष्ट रूप से खंडन करती हूं क्योंकि ये आरोप एक कंगारू अदालत द्वारा लगाए गए हैं, जिसका नियंत्रण राजनीतिक विरोधियों के हाथों में हैं. याद रखिए एक भी बांग्लादेशी को इस अंतरिम सरकार को वोट देने का मौका नहीं मिला. इसमें जवाबदेही या उचित प्रक्रिया के प्रति कोई सच्चा सम्मान नहीं है.
मानवता के विरुद्ध अपराधों की सुनवाई आईसीसी में निष्पक्ष होनी चाहिए
अवामी लीग ने अपने नेताओं और समर्थकों के खिलाफ हिंसा की जांच के लिए आईसीसी से संपर्क किया है, आपको कितना विश्वास है कि यह कदम सफल होगा? इस पर शेख हसीना ने कहा कि मानवता के विरुद्ध अपराधों की सुनवाई आईसीसी जैसे निष्पक्ष अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण द्वारा निष्पक्ष रूप से की जानी चाहिए. अवामी लीग के सदस्यों और समर्थकों, न्यायपालिका के सदस्यों, पत्रकारों और धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर की गई जवाबी हिंसा की अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में व्यापक रूप से रिपोर्टिंग की गई है और कई मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र ने भी इसकी आलोचना की है.
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