भारत ने बुधवार (5 नवंबर, 2025) को पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की टिप्पणी के बाद तीखी प्रतिक्रिया दी है. भारत ने सख्त लहजे में कहा कि पाकिस्तान अपने विकास से जुड़ी गंभीर चुनौतियों पर ध्यान दे. वो भारत पर झूठे आरोप लगाने से बाज आए.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भारत पर आरोप लगाया था कि दिल्ली पानी को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है. इस टिप्पणी के बाद भारत सरकार के मंत्री मनसुख मांडविया ने कतर की राजधानी दोहा में आयोजित वर्ल्ड समिट फॉर सोशल डेवलपमेंट के मंच से पाकिस्तानी राष्ट्रपति को खरी-खरी सुना दी.
वर्ल्ड समिट में क्या बोले मनसुख मांडविया?
भारत सरकार में श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने समिट में कहा, ‘हम पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की ओर से भारत पर किए गए अनुचित और बेबुनियाद टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताते हैं.’
मांडविया ने जरदारी के सिंधु जल समझौता और कश्मीर से संबंधित बयानों को एक अंतरराष्ट्रीय मंच का दुरुपयोग बताया. उन्होंने कहा, ‘यह एक अंतरराष्ट्रीय मंच का दुरुपयोग है. भारत के खिलाफ भ्रामक प्रचार फैलाकर दुनिया का ध्यान सामाजिक विकास के असली मुद्दों से भटकाने की कोशिश की जा रही है.’
उन्होंने समिट के दौरान तथ्य स्पष्ट करते हुए कहा, ‘सिंधु जल समझौता के संदर्भ में पाकिस्तान ने लगातार दुश्मनी और सीमा पार आतंकवाद के जरिए इस समझौते की भावना को कमजोर किया है. उसने कई बार समझौते की व्यवस्थाओं का दुरुपयोग कर भारत के वैध प्रोजेक्ट्स को बाधित करने की कोशिश की है.’
कश्मीर पर बोलने का पाकिस्तान को कोई अधिकार नहीं: मांडविया
मांडविया ने कहा, ‘जहां तक भारत के केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का सवाल है तो पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों में टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है. यह विशेष रूप से तभी लागू होता है जब पाकिस्तान भारत के नागरिकों के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद की गतिविधियों में लिप्त रहता है.’
उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान को अपने देश के विकास से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि यही वो समस्याएं हैं, जिनके कारण आज पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से दिए जाने वाले खैरात पर निर्भर हो गया है.’
पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने क्या की थी टिप्पणी?
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने मंगलवार (4 नवंबर, 2025) को अपने भाषण के दौरान आरोप लगाया था कि भारत सिंधु जल समझौते का उल्लंघन कर रहा है. जरदारी ने इस कदम को एक गंभीर खतरा बताते हुए कहा था, ‘अब पानी को पाकिस्तान के खिलाफ एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. समझौते का उल्लंघन का मतलब लाखों पाकिस्तानियों को उनके पानी के अधिकार से वंचित करना है.’
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