अमेरिका और चीन दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव कई दिनों से बना हुआ है। टैरिफ को लेकर दोनों देशों में खुले तौर पर मतभेद दिख रहे हैं। कई बार को युद्ध की आहट भी सुनाई पड़ी। इसी को देखते हुए दोनों देशों ने सैन्य से सैन्य चैनल खोलने पर सहमति दी है। अब दोनों देशों की सेनाएं आपस में सीधे बात कर सकेंगी। बताया जा है कि इससे सेनाओं के बीच संबंध अच्छे होंगे और देश की राजनीति में तनाव कम होने में मदद मिलेगी।
अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने बताया कि चीन के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून से मुलाकात हुई है। दोनों ने संचार को मजबूत करने, द्विपक्षीय संबंधों में स्थिरता बनाए रखने और किसी भी उत्पन्न होने वाली समस्याओं को कम करने और तनाव कम करने के लिए सैन्य-से-सैन्य चैनल स्थापित करने पर सहमति दी है।
क्या होता है ‘सैन्य-से-सैन्य चैनल’?
‘सैन्य से सैन्य चैनल’ का मतलब दो या दो से अधिक देशों की सेनाओं के बीच सीधा संचार स्थापित करना। इस प्रक्रिया का उद्देश्य सैन्य तनाव को कम करना, गलतफहमी को दूर करना और संकट की स्थिति में प्रभावी संचार करना है। सैन्य से सैन्य संचार चैनल का प्राथमिक उद्देश्य सैन्य जोखिमों को कम करना है। यह तरीका मदद करता है कि दोनों पक्ष एक दूसरे के इरादों को समझें। साथ ही अनजाने में युद्ध शुरू होने की संभावना को कम करता है।
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