यक्षी चोल वास्तुकला का अद्भुत रहस्य! जानिए यक्षी की मूर्तियों से जुड़ी कहानियां?

दक्षिण भारत स्थित तंजावुर के वृहदीश्वर मंदिर चोल वास्तुकला का उतकृष्ट उदाहरण हैं. इस मंदिर को राजा राज चोल प्रथम ने हजारों साल पहले बनाया था.

दक्षिण भारत स्थित तंजावुर के वृहदीश्वर मंदिर चोल वास्तुकला का उतकृष्ट उदाहरण हैं. इस मंदिर को राजा राज चोल प्रथम ने हजारों साल पहले बनाया था.

यह मंदिर अपने विशाल विमा, आकर्षक कलाकृतियां और जटिल मूर्तियों के लिए पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाता है. देश विदेश से लोग बड़ी संख्या में इन मंदिरों में दर्शन के लिए आते हैं.

यह मंदिर अपने विशाल विमा, आकर्षक कलाकृतियां और जटिल मूर्तियों के लिए पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाता है. देश विदेश से लोग बड़ी संख्या में इन मंदिरों में दर्शन के लिए आते हैं.

मंदिर कई नक्काशियों में यक्षी की मूर्तियां भी हैं. एक पौराणिक प्राणी जिसे लेकर हमेशा कहा जाता है कि, वह सभी की मनोकामनाएं पूरी करती हैं.

मंदिर कई नक्काशियों में यक्षी की मूर्तियां भी हैं. एक पौराणिक प्राणी जिसे लेकर हमेशा कहा जाता है कि, वह सभी की मनोकामनाएं पूरी करती हैं.

प्रौराणिक कथाओं में यक्षियों को धन के संरक्षक भगवान कुबेर की सेविका के रूप में बताया गया है. यहां की मूर्तियां चोलवंश की कलात्मकता और रहस्यवाद को दर्शाती है.

प्रौराणिक कथाओं में यक्षियों को धन के संरक्षक भगवान कुबेर की सेविका के रूप में बताया गया है. यहां की मूर्तियां चोलवंश की कलात्मकता और रहस्यवाद को दर्शाती है.

यक्षी के नाम का मतलब सभी की मनोकामनाओं को पूरा करने वाला प्राणी है. वह अदम्य स्त्रीत्व का अवतार मानी जाती हैं. चोल वंश की वास्तुकला में यक्षी की उपस्थिति साफ साफ देखी जा सकती है.

यक्षी के नाम का मतलब सभी की मनोकामनाओं को पूरा करने वाला प्राणी है. वह अदम्य स्त्रीत्व का अवतार मानी जाती हैं. चोल वंश की वास्तुकला में यक्षी की उपस्थिति साफ साफ देखी जा सकती है.

Published at : 02 Nov 2025 04:35 PM (IST)

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