47th ASEAN Summit 2025: मलेशिया की राजधानी कुआलालम्पुर में 2 दिवसीय आसियान समिट आज से शुरू हो रहा है. यह 47वां समिट है, जो 26 अक्टूबर से 28 अक्टूबर 2025 तक कुआलालम्पुर कन्वेंशन सेंटर (KLCC) चलेगा. समिट में शिरकत करने के लिए भारत की ओर से विदेश मंत्री जयशंकर गए हैं. वहीं प्रधानमंत्री मोदी समिट से ऑनलाइन कनेक्ट होंगे. मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम समिट की अध्यक्षता करेंगे.
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President @realDonaldTrump dances at Malaysian arrival ceremony 🇺🇸🇲🇾 pic.twitter.com/e7Zrw3L35Y
—विज्ञापन—— Margo Martin (@MargoMartin47) October 26, 2025
राष्ट्रपति ट्रंप फिर करते दिखे डांस
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी समिट में हिस्सा लेने के लिए मलेशिया पहुंच गए हैं, जहां एयरपोर्ट पर उनका स्वागत प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने किया. वहीं इस दौरान मलेशिया के कलाकारों ने पारंपरिक लोकनृत्य की प्रस्तुति भी दी, जिसे देखकर राष्ट्रपति ट्रंप भी थिरकने लगे. समिट में ट्रंप चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग से मिल सकते हैं, लेकिन भारत और कनाडा के प्रतिनिधियों से उनकी मुलाकात का प्लान नहीं है.
कौन हैं आसियान संगठन के सदस्य?
8 अगस्त 1967 को एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशन्स (आसियान) संगठन स्थापित हुआ था, जिसमें में दक्षिण-पूर्व एशिया के 10 सदस्य देश ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं. संगठन के शिखर सम्मेलन साल में 2 बार होते हैं. इसके अलावा अलग-अलग लेवल पर बैठकें होती हैं. आसियान का हेड ऑफिस इंडोनेशिया के जकार्ता में है. भारत, अमेरिका, चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देश आसियान के डायलॉग पार्टनर हैं.
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क्या है आसियान समिट का मकसद?
आसियान समिट में सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों, क्षेत्रीय शांति की स्थापना, आर्थिक सहयोग बढ़ाने, वैश्विक मुद्दों जैसे व्यापार युद्ध, जलवायु परिवर्तन तथा मानवीय संकटों पर चर्चा होती है. इस बार आसियान समिट में म्यांमार संकट, गाजा संकट, थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद और अमेरिका-चीन व्यापार तनाव, टैरिफ समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है. पिछला समिट मई 2025 में हुआ था, जिसमें अमेरिकी टैरिफ और आर्थिक विविधीकरण पर चर्चा हुई थी.
भारत के लिए आसियान समिट के मायने
भारत के लिए आसियान समिट 2025 का विशेष महत्व है, क्योंकि इससे भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी को बढ़ावा देने का मौका मिलता है. क्षेत्रीय भू-राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक हितों को बढ़ावा देने मंच मिलता है. भारत और आसियान के बीच साल 2010 में आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए मुक्त व्यापार समझौता (FTA) हुआ, जो आज तक जारी है. समिट में व्यापार को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी.
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हिंद महासागर और प्रशांत महासागर रणनीतिक दृष्टि से और सुरक्षा के लिहाज से आसियान बेहद जरूरी है. समिट में दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता पर चर्चा होगी. भारत और आसियान के सदस्य देशों के बीच बौद्ध और हिंदू सांस्कृतिक संबंध काफी गहरे हैं. सांस्कृतिक आदान-प्रदान और टूरिज्म सेक्टर में सहयोग काफी मजबूत है. जलवायु परिवर्तन, व्यापार युद्ध और जलवायु वित्त जैसे मुद्दों पर भी आसियान समिट में चर्चा होती है.
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