Shani Dev: शनि देव केवल डराते ही नहीं डरते भी हैं! जानें किन 5 से लगता है शनि को भय?

सूर्यपुत्र शनिदेव के बारे में कहा जाता है कि उनका गुस्‍सैल स्‍वभाव और ग्रहदशा किसी को भी बर्बाद कर सकती है. लेकिन ऐसा हर किसी के साथ नहीं होता है. शनिदेव केवल उन्‍हीं लोगों को परेशान करते हैं, जिनके कर्म बुरे होते हैं. शनिदेव न्‍याय के देवता हैं. यही वजह है कि भगवान शिव ने शनिदेव को नवग्रहों में न्यायाधीश का काम सौंपा है. मगर क्‍या आप जानते हैं कि वह शनिदेव जिनके प्रकोप से सारी दुनिया डरती है, लेकिन वह खुद भी इन 5 से डरते हैं.

सूर्यपुत्र शनिदेव के बारे में कहा जाता है कि उनका गुस्‍सैल स्‍वभाव और ग्रहदशा किसी को भी बर्बाद कर सकती है. लेकिन ऐसा हर किसी के साथ नहीं होता है. शनिदेव केवल उन्‍हीं लोगों को परेशान करते हैं, जिनके कर्म बुरे होते हैं. शनिदेव न्‍याय के देवता हैं. यही वजह है कि भगवान शिव ने शनिदेव को नवग्रहों में न्यायाधीश का काम सौंपा है. मगर क्‍या आप जानते हैं कि वह शनिदेव जिनके प्रकोप से सारी दुनिया डरती है, लेकिन वह खुद भी इन 5 से डरते हैं.

माना जाता है कि शनिदेव पवनपुत्र हनुमान जी से भी बहुत डरते हैं. इसलिए ऐसा कहा जाता है कि हनुमान जी के दर्शन और उनकी भक्ति करने से शनि के सभी दोष समाप्‍त हो जाते हैं. जो लोग हनुमान जी की नियमित रूप से पूजा करते हैं, उन पर शनि की ग्रहदशा का खास प्रभाव नहीं पड़ता है.

माना जाता है कि शनिदेव पवनपुत्र हनुमान जी से भी बहुत डरते हैं. इसलिए ऐसा कहा जाता है कि हनुमान जी के दर्शन और उनकी भक्ति करने से शनि के सभी दोष समाप्‍त हो जाते हैं. जो लोग हनुमान जी की नियमित रूप से पूजा करते हैं, उन पर शनि की ग्रहदशा का खास प्रभाव नहीं पड़ता है.

अपनी लीला से सबक सिखाने वाले भगवान श्रीकृष्‍ण को शनिदेव का इष्‍ट माना जाता है. मान्‍यता है कि अपने इष्‍ट का एक दर्शन पाने को शनिदेव ने कोकिला वन में तपस्‍या की थी. शनिदेव के कठोर तप से प्रसन्‍न होकर श्रीकृष्‍णजी ने कोयल के रूप में दर्शन दिए. तब शनिदेव ने कहा था कि वह अब से कृष्‍णजी के भक्‍तों को परेशान नहीं करेंगे.

अपनी लीला से सबक सिखाने वाले भगवान श्रीकृष्‍ण को शनिदेव का इष्‍ट माना जाता है. मान्‍यता है कि अपने इष्‍ट का एक दर्शन पाने को शनिदेव ने कोकिला वन में तपस्‍या की थी. शनिदेव के कठोर तप से प्रसन्‍न होकर श्रीकृष्‍णजी ने कोयल के रूप में दर्शन दिए. तब शनिदेव ने कहा था कि वह अब से कृष्‍णजी के भक्‍तों को परेशान नहीं करेंगे.

पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार, शनिदेव को पीपल से भी डर लगता है. इसलिए शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनिदेव प्रसन्‍न होते हैं. शास्‍त्रों में बताया गया है कि जो पिप्‍लाद मुनि का नाम जपेगा और पीपल की पूजा करेगा, उस पर शनिदशा का अधिक प्रभाव नहीं होगा.

पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार, शनिदेव को पीपल से भी डर लगता है. इसलिए शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनिदेव प्रसन्‍न होते हैं. शास्‍त्रों में बताया गया है कि जो पिप्‍लाद मुनि का नाम जपेगा और पीपल की पूजा करेगा, उस पर शनिदशा का अधिक प्रभाव नहीं होगा.

शनि महाराज अपनी पत्नी से भय खाते हैं. इसलिए ज्योतिषशास्त्र में शनि की दशा में शनि पत्नी का नाम मंत्र जपना भी शनि दोष से बचने का एक उपाय माना गया है. इसकी कथा यह है कि एक समय शनि पत्नी ऋतु स्नान करके शनि महाराज के पास आई, लेकिन अपने ईष्ट देव श्रीकृष्ण के ध्यान में लीन शनि महाराज ने पत्नी की ओर नहीं देखा. क्रोधित होकर पत्नी ने शाप दे दिया था.

शनि महाराज अपनी पत्नी से भय खाते हैं. इसलिए ज्योतिषशास्त्र में शनि की दशा में शनि पत्नी का नाम मंत्र जपना भी शनि दोष से बचने का एक उपाय माना गया है. इसकी कथा यह है कि एक समय शनि पत्नी ऋतु स्नान करके शनि महाराज के पास आई, लेकिन अपने ईष्ट देव श्रीकृष्ण के ध्यान में लीन शनि महाराज ने पत्नी की ओर नहीं देखा. क्रोधित होकर पत्नी ने शाप दे दिया था.

पिता सूर्यदेव के कहने पर शनिदेव को बचपन में एक बार सबक सिखाने के लिए शिवजी ने उन पर प्रहार किया था. शनिदेव इससे बेहोश हो गए तो पिता के विनती करने पर शिवजी ने वापस उन्‍हें सही किया. तब से मान्‍यता है कि शनिदेव शिवजी को अपना गुरु मानकर उनसे डरते  हैं.

पिता सूर्यदेव के कहने पर शनिदेव को बचपन में एक बार सबक सिखाने के लिए शिवजी ने उन पर प्रहार किया था. शनिदेव इससे बेहोश हो गए तो पिता के विनती करने पर शिवजी ने वापस उन्‍हें सही किया. तब से मान्‍यता है कि शनिदेव शिवजी को अपना गुरु मानकर उनसे डरते हैं.

Published at : 23 Oct 2025 03:30 PM (IST)

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