
दिवाली के दिन लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति स्थापति कर हर कोई पूरे श्रद्धानुसार और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करता है. लेकिन इसके बाद मन में यही सवाल रहता है कि, नई मूर्ति में पूजा के बाद पुरानी मूर्ति का क्या करना चाहिए.

दिवाली के दिन लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्ति लाकर पूजा की जाती है. लेकिन इसके बाद पुरानी मूर्ति को इधर-उधर फेंकने या रखने से बचें. किसी भी देवी या देवता की मूर्ति को पूजा के बाद फेंकना या कूड़े में डालना अशुभ और अनुचित होता है.

दिवाली के बाद पुरानी मूर्ति की भी पूजा करें और इसके बाद मूर्ति को सम्मानपूर्वक विदा करें. नई मूर्ति को उसी स्थान पर विराजित कर दें, जहां आपने पुरानी मूर्ति सालभर रखी थी.

लक्ष्मी-गणेश की पुरानी मूर्ति को किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दें. यदि मिट्टी इको फ्रेंडली हो तो घर पर भी किसी टब, बाल्टी या गमले में पानी डालकर विसर्जित कर सकते हैं.

मिट्टी की मूर्ति को पूजा के लिए बहुत शुभ और शुद्ध माना जाता है. लेकिन इसी के साथ मिट्टी की मूर्तियां नए जीवन और नश्वरता का प्रतीक भी मानी जाती है. इसलिए पूजा-पाठ के बाद इनका विसर्जन करना जरूरी होता है.

यदि लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति सोना, चांदी या पीतल जैसी धातुओं की हो तो आप गंगाजल से साफ करके इन्हीं मूर्तियों का इस्तेमाल हर साल दिवाली पूजन में कर सकते हैं. इन्हें बदलने या विसर्जन करने की आवश्यकता नहीं होती है. धातु निर्मित मूर्तियों को स्थाई माना जाता है.
Published at : 22 Oct 2025 07:11 AM (IST)
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