
भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में छप्पन भोग सिर्फ 56 व्यंजनों की सूची आस्था, कृतज्ञता और सेवा का जीवंत प्रतीक है. गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव पर मंदिरों और घरों में 56 प्रकार के पकवान सजाए जाते हैं.

छप्पन भोग का रहस्य दो महत्वपूर्ण बातों पर आधारित है. भगवत पुराण के अनुसार जब इंद्रदेव ने व्रज पर प्रलयंकारी वर्षा की, तब श्रीकृष्ण ने सात दिन तक गोवर्धन पर्वत उठाकर गोपालकों और गायों की रक्षा की. इस दौरान उन्होंने न भोजन किया, न विश्राम किया. वैष्णव परंपरा में ठाकुरजी की सेवा दिन के आठ खंडों में होती है. इन आठ खंडों में नैवेद्य अर्पित किया जाता है. सात दिन यह आठ सेवाएं दी जाती है. यानी कि 56 तरह के व्यंजन के भोग लगते हैं.

अन्नकूट पूजा में थाली को ‘कूट’ यानी पहाड़ जैसी सजावट दी जाती है. इसमें मुख्य रूप से अनाज, दालें, मिठाइयां, नमकीन, फल और पेय शामिल होते हैं. घी से बने व्यंजन अनिवार्य होते हैं क्योंकि घी शुद्धता और सात्त्विकता का प्रतीक है. थाली का आकार और सजावट क्षेत्रानुसार बदल सकती है. लेकिन मूल भावना समान रहती है

प्पन भोग के प्रत्येक व्यंजन का अपना धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है. अनाज और दालें धरती के पोषण का आभार दर्शाती हैं. मिठाइयां जीवन में आनंद और मिठास का प्रतीक हैं. फल और मेवे प्रकृति की भेंट माने जाते हैं. दूध, दही तथा घी कृष्ण के ग्वालबाल जीवन की याद दिलाते हैं.

छप्पन भोग सिर्फ स्वाद का आनंद नहीं है. यह सेवा, श्रद्धा और भगवान के प्रति आभार का अनुभव है. हर व्यंजन अर्पित करते समय भक्त अपने मन में प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करता है. यह संदेश देता है कि भोग केवल खाने के लिए नहीं, बल्कि जीवन की हर अनुभूति को स्वीकारने और आभार प्रकट करने के लिए है.

आज डिजिटल मीडिया पर भी छप्पन भोग और अन्नकूट महोत्सव की जानकारी साझा की जाती है. वीडियो, फोटो और ब्लॉग के माध्यम से लोग न सिर्फ भक्ति का अनुभव ले सकते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को इस परंपरा से जोड़ सकते हैं. यह हमें याद दिलाता है कि हमारी संस्कृति केवल इतिहास नहीं, बल्कि आज भी जीवंत है.
Published at : 18 Oct 2025 08:51 AM (IST)
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