कभी-कभी क्रिकेट (Cricket) के मैदान पर ऐसे पल आते हैं जो इतिहास की किताबों में हमेशा के लिए दर्ज हो जाते हैं। गेंद आसमान में उड़ती है, भीड़ की आवाज़ गूंजती है और स्कोरबोर्ड की संख्याएँ मानो थमने का नाम ही नहीं लेतीं।
उस दिन मुंबई के एक स्कूल मैदान में कुछ ऐसा ही हुआ, जिसने पूरे क्रिकेट (Cricket) जगत को हैरान कर दिया। चौकों और छक्कों की बारिश, टूटते रिकॉर्ड्स और एक ऐसी पारी, जिसे देखकर हर किसी ने कहा “ऐसा क्रिकेट हमने पहले कभी नहीं देखा।”
दो दिनों का तूफान – KC गांधी इंग्लिश स्कूल की 1465 रनों की पारी
यह बात हैं साल 2016 की जब मुंबई के भंडारी कप टूर्नामेंट के दौरान KC गांधी इंग्लिश स्कूल ने ऐसा खेल दिखाया, जिसे देखकर सब दंग रह गए। आर्या गुरुकुल की टीम पहले बल्लेबाज़ी करने उतरी और महज़ 31 रन पर सिमट गई।किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि इसके बाद जो होने वाला है, वह क्रिकेट इतिहास में दर्ज हो जाएगा।
जब KC गांधी की टीम बल्लेबाज़ी के लिए उतरी, तो शुरू से ही उनके खिलाड़ी लय में नजर आए , रन लगातार बढ़ते गए और विपक्षी गेंदबाजों के लिए उन्हें रोक पाना मुश्किल होता गया। पहले दिन के अंत तक टीम का स्कोर चार अंकों के करीब पहुंच चुका था। अगले दिन भी वही सिलसिला जारी रहा और आखिरकार टीम ने 1465 रन बनाकर अपनी पारी घोषित की।
Cricket इतिहास की सबसे बड़ी पारी — प्रणव धनावड़े के 1009 नाबाद रन
इस मुकाबले का असली नायक बना एक 15 वर्षीय खिलाड़ी, प्रणव धनावड़े। उसने सिर्फ रन नहीं बनाए, बल्कि खेल की परिभाषा ही बदल दी। पहले दिन की धमाकेदार शुरुआत के बाद उसने दूसरे दिन भी रनों की बरसात जारी रखी और देखते ही देखते अपने नाम के आगे 1009* लिखवा दिया। 327 गेंदों में खेले गए इस तूफानी नाबाद शतक में 129 चौके और 59 छक्के शामिल थे।
उसका हर शॉट दर्शकों के दिलों में गूंजता रहा। यह स्कोर क्रिकेट (Cricket) इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी बन गया, जिसने 117 साल पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया।

117 साल पुराना रिकॉर्ड बना इतिहास
प्रणव धनावड़े की इस ऐतिहासिक पारी से पहले यह क्रिकेट (Cricket) रिकॉर्ड इंग्लैंड के बल्लेबाज आर्थर कॉलिन्स के नाम था, जिन्होंने साल 1899 में 628 नाबाद रन बनाए थे। उस रिकॉर्ड को एक सदी से अधिक समय तक कोई छू भी नहीं सका था, लेकिन प्रणव ने उसे ऐसे पीछे छोड़ा जैसे वह किसी और युग की बात हो।
उनकी यह पारी सिर्फ एक स्कोर नहीं थी, बल्कि यह संदेश थी कि अगर जज़्बा और आत्मविश्वास हो तो उम्र मायने नहीं रखती।
जब यह खबर फैली, तो भारतीय क्रिकेट (Cricket) जगत में मानो हलचल मच गई। सचिन तेंदुलकर और एमएस धोनी जैसे दिग्गजों ने उन्हें बधाई दी, जबकि इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक आथर्टन ने कहा “ऐसी पारी शायद एक सदी में एक बार ही देखने को मिलती है।” उस वक्त पूरा क्रिकेट जगत प्रणव नाम की गूंज से भरा था।
आर्या गुरुकुल फिर बिखर गई — दूसरी पारी में सिर्फ 52 रन
इतने विशाल स्कोर के बाद आर्या गुरुकुल की टीम दोबारा क्रिकेट (Cricket) मैदान पर उतरी, लेकिन मनोबल पहले ही टूट चुका था। गेंदबाजों के सामने बल्लेबाज एक बार फिर टिक नहीं पाए। कोई भी खिलाड़ी टीम को संकट से निकालने में सफल नहीं हुआ और पूरी पारी सिर्फ 52 रन पर सिमट गई।
दो पारियों में कुल 83 रन बनाने वाली आर्या गुरुकुल को एक पारी और 1382 रनों से हार का सामना करना पड़ा। यह नतीजा जितना एकतरफा था, उतना ही अविश्वसनीय भी। मैदान पर खड़े सभी लोगों ने उस दिन देखा कि जब जुनून, आत्मविश्वास और प्रतिभा एक साथ हों तो क्रिकेट में कुछ भी असंभव नहीं।
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