दिवाली कब? राजस्थान के ज्योतिषी ने दूर किया डेट को लेकर कन्फ्यूजन, आप भी नोट कर लें 20 या 21 अक्टूबर कब होगा लक्ष्मी पूजन

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दिवाली 2025 पर फिर से वही भ्रम की स्थिति बनी है, दो दिन अमावस्या! लेकिन शास्त्रों और पंचांग गणना के अनुसार 20 अक्टूबर 2025 की रात्रि ही प्रदोष-अमावस्या और निशीथकाल का संयोग बना रही है. इसी दिन मां महालक्ष्मी, गणेश और कुबेर पूजन सर्वश्रेष्ठ रहेगा. इसलिए न संशय रखें, न भ्रम. 20 अक्टूबर 2025 की रात ही करें दिवाली पूजा.

पंचांग जानकारी

  • तिथि: अमावस्या (कार्तिक कृष्ण पक्ष)
  • दिनांक: 20 अक्टूबर 2025 (सोमवार)
  • चंद्र राशि: तुला
  • नक्षत्र: स्वाति
  • योग: सिद्धि योग
  • विशेष: प्रदोष-अमावस्या और निशीथकाल का अद्वितीय योग

दीपोत्सव कैलेंडर 2025

18 अक्टूबर 2025, धनतेरस

  • खरीददारी के शुभ मुहूर्त: दोपहर 12:15 से 1:30 बजे व 2:30 से 4:15 बजे तक
  • यम दीपदान व पूजा मुहूर्त: शाम 6:03 से रात 8:35 बजे तक
  • वृषभ काल: शाम 7:37 से रात 9:33 बजे तक

19 अक्टूबर 2025 रूप चतुर्दशी (नरक चतुर्दशी)

  • लाभ-अमृत चौघड़िया: 10:15 से 3:15 दोपहर तक
  • शुभ चौघड़िया: दोपहर 2:00 से 3:00 तक

20 अक्टूबर 2025 दिवाली (महारात्रि – मुख्य पूजा)

  • लक्ष्मी-गणेश पूजन मुहूर्त: शाम 7:08 से रात 8:18 बजे तक
  • प्रदोष काल: शाम 5:46 से रात 8:18 बजे तक
  • वृषभ काल: रात 7:29 से 9:26 तक
  • सिंह लग्न: रात 1:57 से 4:12 तक

इस मुहूर्त में की गई पूजा से घर में सुख, वैभव और धन की स्थायी वृद्धि होती है.

21 अक्टूबर 2025 दिवाली (गृह पूजा व उत्सव दिवस)

  • गोधूलि प्रदोष वेला: 6:00 से 8:33 शाम/रात
  • वृषभ लग्न: 7:25 से 9:22 रात
  • सिंह लग्न: 1:53 से 4:08 रात्रि

22 अक्टूबर 2025 गोवर्धन पूजा

  • लाभ-अमृत चौघड़िया: 7:00 से 9:00 सुबह

23 अक्टूबर 2025 भाई दूज

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:15 से 1:30 तक
  • शुभ चौघड़िया: शाम 5:00 से 6:00 तक

महालक्ष्मी-पूजन शास्त्रसम्मत कब ?

दिवाली रात्रिकालीन साधना का पर्व है. इसमें उदय तिथि की अपेक्षा प्रदोष व निशीथकाल प्रमुख हैं. चार पवित्र रात्रियां होती हैं, कालरात्रि (शिवरात्रि), महारात्रि (दिवाली), मोह-रात्रि (जन्माष्टमी) और दारुण रात्रि (होली-दहन) उन्हीं समयों पर मनाई जाती हैं जब तिथि मध्यरात्रि में विद्यमान हो. इस बार 20 अक्टूबर को वही संयोग बन रहा है. अतः उसी दिन महालक्ष्मी-पूजन करना शास्त्रसम्मत और फलप्रद है.

अमावास्यायां तु प्रदोषकाले दीपदानं विशेषतः. लक्ष्म्यै च विधिवद् पूजां धनधान्यप्रदं स्मृतम्॥ यानी अमावस्या के प्रदोषकाल में दीपदान और लक्ष्मी पूजन करने से धन-धान्य व सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.

20 अक्टूबर की रात्रि, प्रदोष-अमावस्या, निशीथकाल, सिद्धि योग और वृषभ लग्न, सभी शास्त्रसम्मत संकेत हैं कि मुख्य दिवाली पूजन इसी दिन करें. 21 अक्टूबर को सामाजिक उत्सव, गृह-सज्जा और परिवारिक पूजा भी शुभ मानी जाएगी.

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