भारतीय फार्मा सेक्टर का बड़ा सौदा, TPG ने साई लाइफ साइंसेज से पूरी तरह किया एग्जिट, शेयर में दिखी भारी गिरावट टीपीजी ने साई लाइफ साइंसेज में अपनी पूरी 14.7% हिस्सेदारी खुले बाजार सौदे से 2,675 करोड़ रुपये में बेच दी. यह बिक्री तीन किस्तों में NSE पर की गई.

प्राइवेट इक्विटी कंपनी टीपीजी (TPG) ने मंगलवार को भारतीय फार्मा सेक्टर से जुड़े एक बड़े सौदे को अंजाम दिया. कंपनी ने दवा और रिसर्च सेवाएं देने वाली साई लाइफ साइंसेज में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी. यह हिस्सेदारी करीब 14.7 प्रतिशत थी और इसे खुले बाजार के जरिए बेचा गया. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर दर्ज थोक सौदे (Bulk Deal) के आंकड़ों के मुताबिक, यह लेनदेन कुल मिलाकर 2,675 करोड़ रुपए का रहा. इसका असर कल इसके शेयर पर भी दिखा उसमें भी 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी गई.

ऐसे हुआ यह बड़ा सौदा

अमेरिका स्थित प्राइवेट इक्विटी फर्म टीपीजी ने यह सौदा अपनी सहयोगी कंपनी TPG Asia VII SF Pvt Ltd के जरिए पूरा किया. कंपनी ने तीन अलग-अलग किस्तों में शेयरों की बिक्री की. इस दौरान कुल 3.07 करोड़ से अधिक इक्विटी शेयर बेचे गए, जो कंपनी में टीपीजी की पूरी 14.72 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर थे.

शेयरों की बिक्री 871.01 रुपए से 871.86 रुपए प्रति शेयर की कीमत पर की गई. इस आधार पर सौदे का कुल मूल्य लगभग 2,675.64 करोड़ रुपए रहा. यह सौदा भारतीय फार्मा सेक्टर में हाल के समय के बड़े लेनदेन में से एक माना जा रहा है.

क्या करती है ये कंपनी?

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साई लाइफ साइंसेज हैदराबाद स्थित एक फार्मा कंपनी है जो दवा अनुसंधान, विकास और कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च सेवाओं के लिए जानी जाती है. कंपनी वैश्विक स्तर पर फार्मा और बायोटेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ काम करती है. इसके जरिए नए ड्रग्स की खोज, प्रीक्लिनिकल रिसर्च और कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग जैसी सेवाएं दी जाती हैं. फार्मा सेक्टर में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) सेवाओं की बढ़ती मांग ने साई लाइफ साइंसेज को एक अहम खिलाड़ी बना दिया है.

टीपीजी ने कई साल पहले साई लाइफ साइंसेज में निवेश किया था. प्राइवेट इक्विटी कंपनियां आमतौर पर तेजी से बढ़ रही कंपनियों में पूंजी लगाकर उन्हें विस्तार में मदद करती हैं और फिर एक तय समय पर हिस्सेदारी बेचकर मुनाफा कमाती हैं. टीपीजी का यह एग्जिट उसी रणनीति का हिस्सा है. इस सौदे के बाद टीपीजी पूरी तरह से साई लाइफ साइंसेज से बाहर निकल गई है.

इस सेक्टर में आगे भी दिख सकती है हलचल

भले ही टीपीजी ने एग्जिट लिया है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि भारतीय फार्मा कंपनियां लगातार वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं. खासकर कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग सेवाओं की मांग बढ़ने से आने वाले वर्षों में इस सेक्टर में और बड़े निवेश देखने को मिल सकते हैं.

यह सौदा उस समय सामने आया है जब भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी कम होती दिख रही है. प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल कंपनियां लगातार भारतीय कंपनियों में अपने निवेश पोर्टफोलियो का पुनर्गठन कर रही हैं. ऐसे में टीपीजी का यह कदम एक महत्वपूर्ण संकेत है कि निवेशक लाभ लेने के लिए सही समय पर बाजार से बाहर निकलने में सक्रिय रहते हैं.

FAQs

Q1. टीपीजी ने कितनी हिस्सेदारी बेची?

टीपीजी ने 14.72% हिस्सेदारी यानी 3.07 करोड़ से अधिक शेयर बेचे.

Q2. यह सौदा कितने में हुआ?

करीब 2,675.64 करोड़ रुपये में.

Q3. शेयर किस कीमत पर बेचे गए?

871.01 रुपये से 871.86 रुपये प्रति शेयर पर.

Q4. साई लाइफ साइंसेज किस क्षेत्र से जुड़ी है?

यह दवा विकास और कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च सेवाओं वाली फार्मा कंपनी है.

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