प्रेमानंद महाराज पर रामभद्राचार्य का विवादित बयान: संत समाज में आक्रोश, क्या है पूरा मामला?

Premananda Maharaj and Rambhadracharya Controversy: संत प्रेमानंद पर किए गए बयान को लेकर पूरे संत समाज ने आध्यात्मिक गुरु स्वामी रामभद्राचार्य पर नाराजगी जताई है. सनातन धर्म के कई बड़े संतों के साथ-साथ सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के देवेशाचार्य महाराज ने भी स्वामी रामभद्राचार्य के इस बयान पर आपत्ति जताई.

उन्होंने कहा कि यह उनके पद और सनातन धर्म के मूल्यों दोनों के खिलाफ है. स्वामी रामभद्राचार्य एक पूजनीय संत और सनातन धर्म के बड़े गुरु है. उनके मुख से ऐसी भाषा का प्रयोग उचित नहीं है. लोग संतों और गुरुओं से मर्यादित व्यवहार की अपेक्षा रखते हैं.

सीताराम दास महाराज की प्रतिक्रिया
स्वामी रामभद्राचार्य के इस बयान पर सीताराम दास महाराज ने इसे संकीर्ण मानसिकता का परिचायक बताया. उन्होने टिप्पणी करते हुए कहा कि, संत प्रेमानंद महाराज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं, जो युवाओं को सही मार्ग दिखाते हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि संतों को ऐसे बयान-बाजी से बचाना चाहिए. इस तरह की बातों का समर्थन नहीं किया जा सकता है, जो समाज को एकजुट करने का काम न करे. संतों को भी अपने व्यवहार और शब्दों पर संयम रखना चाहिए. जिससे सनातन धर्म की गरिमा बनी रहे. 

हनुमानगढ़ी मंदिर के पुजारी ने दी राय 
मंहत राजू दास जो हनुमानगढ़ी मंदिर के पुजारी हैं. उन्होंने भी इस मुद्दे पर राय रखते हुए कहा कि, स्वामी रामभद्राचार्य और संत प्रेमानंद दोनों ही सनातन धर्म के महान संत हैं. उन्हें ऐसे बयान नहीं देने चाहिए जो समाज को गलत संदेश दे. उन्होंने आग्रह करते हुए संतों को आपस में सम्मान और सद्भाव बनाए रखने को कहा. 

महंत रामेश्वर दास महाराज की आपत्ति
उज्जैन अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रामेश्वर दास महाराज ने इस बयान को अनुचित करार दिया. उन्होंने कहा कि साधु-संतों को ऐसे बयानों से बचना चाहिए, जो समाज में भ्रम और विवाद को जन्म दें. उनका मानना है कि स्वामी रामभद्राचार्य का यह बयान सनातन धर्म की गरिमा के अनुकूल नहीं है.

उन्होंने संत समाज से आग्रह किया कि वे अनावश्यक बयानबाजियों के बजाय एकता और शांति का संदेश समाज और देश को दें.

महंत विशाल दास महाराज का सुझाव
इस बीच महंत विशाल दास महाराज ने संतुलित रुख अपनाते हुए इसे संतों का आंतरिक मामला बताया. उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों संत आपस में बैठकर संवाद के माध्यम से विवाद को सुलझाएं.

उनका कहना था कि दोनों ही संत पूजनीय हैं और यदि कोई मतभेद है तो उसे सौहार्दपूर्ण ढंग से समाप्त करना ही उचित होगा.

क्या कहा था स्वामी रामभद्राचार्य ने?
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने संत प्रेमानंद को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि कोई वास्तविक चमत्कार है, तो प्रेमानंद जी उनके सामने संस्कृत का एक अक्षर बोलकर दिखाएं या उनके द्वारा बोले गए संस्कृत श्लोकों का अर्थ समझाएं.

रामभद्राचार्य ने आगे कहा कि वो मेरे लिए बालक के समान हैं. जिसको शास्त्र आए, वहीं चमत्कार है. उनकी किडनी की डायलिसिस होती रहती है. जिसकी वजह से वह जी रहे हैं, जीने दीजिए.

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