पटियाला हाउस सेशन कोर्ट ने मशहूर चित्रकार एम. एफ. हुसैन की दो पेंटिंग्स को लेकर दर्ज विवादास्पद शिकायत पर पुलिस जांच कराने से इनकार कर दिया है. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि इन पेंटिंग्स से हिंदू धर्म की भावनाएं आहत हुईं. सेशन कोर्ट के एडिशनल जज प्रताप सिंह लालेर ने कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 22 जनवरी को जो फैसला सुनाया था, उसमें कोई गलती नहीं थी. मजिस्ट्रेट ने यह तय किया था कि इस मामले को एक शिकायत केस के रूप में आगे बढ़ाया जाए.
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता एडवोकेट अमिता सचदेवा के पास खुद पेंटिंग्स और गवाहों के जरिए अपने आरोप साबित करने के लिए सबूत मौजूद हैं.
ऐसे हुई विवाद की शुरुआत
कोर्ट में दर्ज शिकायत के मुताबिक 4 दिसंबर 2024 को अमिता सचदेवा दिल्ली की एक आर्ट गैलरी गईं. वहां उन्होंने एम.एफ. हुसैन की दो पेंटिंग्स देखीं, जिन्हें उन्होंने आपत्तिजनक और हिंदू भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला बताया.
इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. लेकिन जब 10 दिसंबर को वह जांच अधिकारी के साथ गैलरी लौटीं तो पेंटिंग्स हटा दी गई थीं. इसके बाद उन्होंने कोर्ट में याचिका दाखिल कर पेंटिंग्स को साक्ष्य के तौर पर सुरक्षित रखने और FIR दर्ज करने की मांग की.
कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने अपनी रिपोर्ट पेश की. इसमें कहा गया कि ये पेंटिंग्स एक निजी प्रदर्शनी का हिस्सा थीं और इनका उद्देश्य केवल कलाकार की मूल रचनाओं को प्रदर्शित करना था.
अदालत के आदेश पर पेंटिंग्स ज़ब्त की गईं, लेकिन पुलिस ने कहा कि इसमें कोई ऐसा सबूत नहीं मिला जो संज्ञेय अपराध साबित कर सके. इसलिए FIR दर्ज नहीं की गई. मजिस्ट्रेट ने भी पुलिस रिपोर्ट को देखकर FIR दर्ज करने से इंकार किया.
अतिरिक्त पुलिस जांच की जरूरत नहीं- कोर्ट
सेशन कोर्ट ने कहा कि BNSS की धारा 299 तभी लागू होती है जब यह साबित हो कि किसी ने जानबूझकर और दुर्भावना से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई हो. कोर्ट ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता के पास पेंटिंग्स की तस्वीरें और निजी अवलोकन मौजूद हैं.
गैलरी स्टाफ या विशेषज्ञों को गवाह के तौर पर बुलाया जा सकता है. पेंटिंग्स और सीसीटीवी फुटेज पहले ही जब्त किए जा चुके हैं. इसलिए इस स्तर पर किसी फॉरेंसिक जांच या अतिरिक्त पुलिस जांच की जरूरत नहीं है.
मजिस्ट्रेट आगे ले सकते हैं फैसला
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर आगे जरूरत पड़े तो मजिस्ट्रेट BNSS की धारा 225 के तहत पुलिस जांच का आदेश दे सकते हैं. फिलहाल मामला एक शिकायत केस के तौर पर आगे बढ़ेगा.
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