अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने टैरिफ और इससे जुड़े बयानों को लेकर पूरी दुनिया में चर्चा में हैं। भारत पर उन्होंने 50% टैरिफ लगाने की बात कही है। चीन के साथ भी उनके रिश्ते काफी बिगड़ चुके थे लेकिन फिलहाल इसमें सुधार होता दिखाई दे रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप ने बढ़ाई टैरिफ की समय सीमा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर टैरिफ की समय सीमा को 90 दिनों के लिए बढ़ाने वाले आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के हवाले से बताया गया कि यह फैसला चीन पर मध्यरात्रि की समय सीमा से कुछ घंटे पहले लिया गया, जब पिछली 90 दिनों की रोक समाप्त होने वाली थी।
इससे पहले सोमवार को ट्रंप ने कहा था कि वे चीन के साथ बहुत अच्छे से व्यवहार कर रहे हैं क्योंकि चीन ने सकारात्मक परिणाम की बात कही थी। अप्रैल में अमेरिका ने चीनी वस्तुओं पर 145 प्रतिशत का भारी-भरकम टैरिफ लगाने की बात कही थी। इस पर चीन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिका पर 125 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया। वहीं, मई में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में एक बैठक के दौरान दोनों देश अस्थायी रूप से टैरिफ कम करने पर सहमत हुए।
अमेरिका ने अपने टैरिफ को 145 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया और चीन ने अपने टैरिफ 125 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिए। दोनों देशों के बीच बातचीत अभी भी जारी है।
ट्रंप की मजबूरी या जरूरी?
ट्रंप प्रशासन और चीन के बीच हाल ही में स्टॉकहोम और जिनेवा में व्यापार वार्ता हुई, जिसके बाद दोनों पक्ष तनाव कम करने और स्थायी समाधान की दिशा में काम कर रहे हैं। माना जा रहा है कि टैरिफ लागू किए जाने की समय सीमा बढ़ाने से दोनों देशों को और समय मिलेगा ताकि वे व्यापार समझौते पर सहमति बना सकें। ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि चीन के साथ उनकी बातचीत अच्छी चल रही है और वे देखेंगे कि आगे क्या होता है।
इसके साथ ही, टैरिफ की समय सीमा बढ़ाने से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और अस्थिरता का खतरा कम होता है। वहीं, ट्रंप पर रिपब्लिकन नेताओं और व्यापारिक संगठनों का दबाव था कि टैरिफ को तुरंत लागू करने से वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ सकता है। संभवतः इसी कारण ट्रंप ने लचीलापन दिखाते हुए समय सीमा बढ़ाई।
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भारत के साथ रिश्तों में आई कड़वाहट के बाद अब डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपने अच्छे संबंधों का जिक्र किया है। इससे यह समझा जा रहा है कि ट्रंप चीन के साथ तनाव बढ़ाने के बजाय कूटनीतिक रास्ता अपनाना चाहते हैं। अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्वीकार किया कि चीन पर टैरिफ लगाना राजनीतिक और आर्थिक रूप से संवेदनशील मुद्दा है। चीन ने 125% जवाबी टैरिफ की धमकी भी दी थी जो अमेरिका के लिए एक झटका माना गया।
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