Hanuman Bahuk: हनुमान जी को कलयुग का देवता कहा जाता है. नियमित रूप से हनुमान जी की पूजा-पाठ करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं. हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की ही तरह हनुमान बाहुक भी अपने आप में प्रभावशाली स्त्रोत है, जिसकी रचना श्री तुलसीदास जी ने की थी.
हनुमान बाहुक स्रोत मुख्य रूप से शारीरिक कष्ट, रोगों, शत्रु बाधा और मानसिक तनाव से छुटकारा दिलाता है. आइए जानते हैं हनुमान बाहुक के लाभ, महत्व, पढ़ने की विधि और नियम के बारे में.
हनुमान बाहुक पढ़ने के फायदे?
- रोगों से छुटकारा- मान्यताओं के मुताबिक तुलसीदास जी को हाथों में असहनीय पीड़ा होने पर उन्होंने इसकी रचना की थी और हनुमान बाहुक के नियमित पाठ से उन्हें कई तरह के चमत्कारी लाभ प्राप्त हुए थे.
- शारीरिक मानसिक बल में वृद्धि- हनुमान बाहुक का निरंतर पाठ करने से मानसिक और शारीरिक बल की प्राप्ति होती है. ये आंतरिक शक्तियों को जागृत करता है.
- शत्रु बाधा से सुरक्षा- हनुमान बाहुक कोर्ट-कचहरी, वाद-विवाद या दुश्मनों से होने वाली परेशानियों से सुरक्षा करता है. इसका पाठ करने से हनुमान जी सदैव आपकी रक्षा के लिए तत्पर होते हैं.
हनुमान बाहुक पूजा विधि और नियम!
- हनुमान बाहुक का पाठ करने से पहले स्नान और साफ वस्त्र धारण करना बेहद जरूरी है.
- पाठ करने से पहले हनुमान जी की मूर्ति या छवि के सामने दीपक जलाएं.
- इसके बाद उन्हें पीले या लाल पुष्प अर्पण करें.
- हनुमान जी को गुड़-चना, सिंदूर, चमेली का तेल अर्पित करना चाहिए.
- प्रत्येक पाठ के बाद ऊँ हनुमते नमः: मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए.
हनुमान बाहुक की शास्त्रीय प्रमाणिकता
हनुमान बाहुक का जिक्र तुलसीदास द्वारा हनुमान भक्ति साहित्य में देखने को मिलता है. यह ग्रंथ मुख्य तौर पर उत्तर भारत में काफी चर्चित है. बनारस, अयोध्या, चित्रकूट जैसे क्षेत्रों में इस ग्रंथ की अधिक महत्व है.
वैदिक ज्योतिष और आयुर्वेदाचार्य भी हनुमान बाहुक के पाठ को मानसिक और शारीरिक मजबूती के लिए सहायक मानते हैं. दीनबंधु दुखहारी, हनुमंत रखवारी। बाहुक बनायो तुलसी, संकट मिटाओ सारी।। हनुमान बाहुक का महत्वपूर्ण श्लोक है.
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