99% इंडियंस नहीं जानते होंगे ऐसे भी होती है कमाई! ये कंपनियां कराती हैं रेगुलर इनकम, बिना घर खरीदे बना देती हैं ‘मकान मालिक’

How to invest REITs: अपना खुद का एक घर या दुकान हो, जिससे हर महीने बैठे-बिठाए किराया आता रहे… यह सपना किसका नहीं होता? लेकिन जब हम हकीकत की जमीन पर उतरते हैं, तो प्रॉपर्टी खरीदने के लिए लगने वाले लाखों-करोड़ों रुपये, कानूनी झंझट और फिर किराएदार ढूंढने की सिरदर्दी देखकर यह सपना, सपना ही रह जाता है. लेकिन क्या हो अगर हम आपसे कहें कि अब आप सिर्फ 10,000 से 15,000 रुपये लगाकर देश के बड़े-बड़े आलीशान ऑफिस पार्कों और बिजनेस सेंटरों में हिस्सेदार बन सकते हैं और हर महीने किराये का अपना हिस्सा पा सकते हैं? जी हाँ, यह बिल्कुल संभव है और इस कमाल के निवेश का नाम है- REITs (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स).

तो चलिए आज इस ‘REITs’ नाम के रॉकेट को समझते हैं और जानते हैं कि कैसे यह आपको बिना कोई प्रॉपर्टी खरीदे, ‘मकान मालिक’ बना सकता है.

ये REITs आखिर हैं क्या बला?

REITs को आप एक बहुत बड़ी रियल एस्टेट कंपनी समझिए. यह कंपनी एक-दो फ्लैट नहीं, बल्कि मुंबई, बेंगलुरु, नोएडा जैसे बड़े शहरों में पूरे के पूरे ऑफिस पार्क, शॉपिंग मॉल या बड़े-बड़े कमर्शियल कॉम्प्लेक्स खरीदती है या बनवाती है. फिर यह कंपनी इन ऑफिस स्पेस को गूगल, टीसीएस, इंफोसिस जैसी बड़ी-बड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को किराए पर देती है, जिससे उसे हर महीने करोड़ों रुपये का किराया मिलता है.

अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें मेरा क्या फायदा? फायदा यहीं से शुरू होता है. यह REITs कंपनी अपने छोटे-छोटे हिस्से (जिन्हें यूनिट्स कहते हैं) स्टॉक मार्केट में बेचती है, ठीक वैसे ही जैसे कोई कंपनी अपने शेयर बेचती है. आप और हम जैसे आम निवेशक इन्हीं यूनिट्स को खरीदते हैं. जब आप एक यूनिट खरीदते हैं, तो आप उस कंपनी और उसकी सभी प्रॉपर्टी में एक बहुत छोटे से हिस्सेदार बन जाते हैं.

यह काम कैसे करता है? किराया आप तक कैसे पहुंचता है?

इसका मॉडल बहुत सीधा और पारदर्शी है:

REITs कंपनी प्रॉपर्टी की मालिक है: वह प्रॉपर्टी का रखरखाव, मैनेजमेंट और किराए पर देने का सारा काम देखती है.

किराया इकट्ठा करना: कंपनी हर महीने अपनी सभी प्रॉपर्टी से किराया इकट्ठा करती है.

खर्चे निकालना: किराए की इस रकम से वह प्रॉपर्टी के रखरखाव, मैनेजमेंट और टैक्स जैसे खर्चे निकालती है.

मुनाफे का बंटवारा: सारे खर्चे निकालने के बाद जो शुद्ध मुनाफा बचता है, उसका कम से कम 90% हिस्सा उसे अपने सभी यूनिट होल्डर्स (यानी आप जैसे निवेशकों) में बांटना ही पड़ता है. यह नियम SEBI ने बनाया है. यही पैसा आपकी जेब में ‘डिविडेंड’ के रूप में आता है, जो असल में किराए से हुई कमाई ही है.

यानी, आपको न तो प्रॉपर्टी खरीदने का झंझट, न किराएदार ढूंढने की टेंशन और न ही मेंटेनेंस की सिरदर्दी, बस घर बैठे किराए का अपना हिस्सा मिलता रहता है.

मैं कैसे कर सकता हूँ इसमें निवेश?

REITs में निवेश करना अब उतना ही आसान है जितना कि किसी कंपनी का शेयर खरीदना.

क्या चाहिए?: आपके पास बस एक डीमैट अकाउंट (Demat Account) होना चाहिए, वही अकाउंट जिससे आप शेयर खरीदते-बेचते हैं.

कहां से खरीदें?: ये REITs, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड हैं. आप अपने ब्रोकर के ऐप या वेबसाइट पर जाकर इनके यूनिट्स को ठीक वैसे ही खरीद और बेच सकते हैं, जैसे आप कोई स्टॉक खरीदते हैं.

पैसा कैसे बनता है? मिलता है डबल फायदा

REITs में निवेश करने पर आपको दो तरह से कमाई होती है:

किराये से कमाई (Dividend Income): जैसा कि ऊपर बताया गया, आपको कंपनी के किराये वाले मुनाफे से नियमित तौर पर एक हिस्सा मिलता रहता है. यह आपकी एक तरह की पैसिव इनकम बन जाती है.

प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ने का फायदा (Capital Appreciation): समय के साथ जैसे-जैसे रियल एस्टेट की कीमतें बढ़ती हैं, वैसे-वैसे REITs की प्रॉपर्टी की वैल्यू भी बढ़ती है. इसका असर आपके खरीदे हुए यूनिट्स की कीमत पर भी पड़ता है और उनकी कीमत भी बढ़ जाती है. यानी, जब आप चाहें, अपने यूनिट्स को बढ़ी हुई कीमत पर बेचकर मुनाफा कमा सकते हैं. ठीक वैसे ही जैसे आप अपना फ्लैट कुछ सालों बाद बढ़ी हुई कीमत पर बेचते हैं.

भारत में कौन-कौन से REITs हैं?

फिलहाल भारत में मुख्य रूप से तीन REITs स्टॉक मार्केट में लिस्टेड हैं, जो सभी कमर्शियल ऑफिस स्पेस पर फोकस करते हैं:

  • Embassy Office Parks REIT
  • Mindspace Business Parks REIT
  • Brookfield India Real Estate Trust

इन तीनों के पास बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद और पुणे जैसे बड़े शहरों में कई बड़े और शानदार ऑफिस एसेट्स हैं.

क्या इसमें कोई रिस्क भी है? निवेश से पहले ध्यान रखें

जैसे हर निवेश में थोड़ा जोखिम होता है, वैसे ही REITs में भी कुछ बातें ध्यान में रखने वाली हैं:

ऑफिस खाली होने का खतरा: REITs की कमाई सीधे तौर पर इस बात पर निर्भर करती है कि उनकी कितनी प्रॉपर्टी किराए पर चढ़ी हुई है. अगर किसी आर्थिक मंदी या ‘वर्क फ्रॉम होम’ जैसे ट्रेंड के कारण कंपनियां ऑफिस खाली करने लगें, तो किराये की कमाई कम हो सकती है, जिसका असर आपके डिविडेंड पर पड़ेगा.

बाजार का उतार-चढ़ाव: चूंकि REITs के यूनिट्स स्टॉक मार्केट में ट्रेड होते हैं, इसलिए उनकी कीमतों में रोजाना उतार-चढ़ाव हो सकता है. इसलिए यह बहुत कम समय के निवेश के लिए उपयुक्त नहीं है.

ब्याज दरों का असर: जब देश में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो लोग FD जैसी सुरक्षित योजनाओं की ओर ज्यादा आकर्षित हो सकते हैं, जिसका असर REITs की कीमतों पर पड़ सकता है.

निष्कर्ष (Conclusion)

REITs, भारत के आम निवेशक के लिए रियल एस्टेट की दुनिया में कदम रखने का एक क्रांतिकारी और सुनहरा दरवाजा है. यह आपको सिर्फ 10-15 हजार रुपये जैसी छोटी रकम में देश की सबसे महंगी और प्राइम कमर्शियल प्रॉपर्टी में हिस्सेदार बनने का मौका देता है. किराये के रूप में नियमित आय और प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ने का दोहरा फायदा इसे एक आकर्षक निवेश बनाता है. हालांकि, किसी भी दूसरे बाजार से जुड़े निवेश की तरह इसमें भी जोखिम शामिल हैं. इसलिए, इसमें अपनी मेहनत की कमाई लगाने से पहले अपनी जोखिम लेने की क्षमता और निवेश के लक्ष्य को जरूर परख लें.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

सवाल 1: REITs में न्यूनतम कितना निवेश कर सकते हैं?

जवाब: आप 10,000 से 15,000 रुपये जैसी छोटी रकम से भी REITs में निवेश शुरू कर सकते हैं.

सवाल 2: क्या REITs में मिलने वाला रिटर्न गारंटीड होता है?

जवाब: नहीं, इसमें रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती. यह कंपनी की किराये से होने वाली आय और बाजार में उसके यूनिट की कीमत के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है.

सवाल 3: क्या REITs में कोई लॉक-इन पीरियड होता है?

जवाब: नहीं, इसमें कोई लॉक-इन पीरियड नहीं होता है. आप अपने खरीदे हुए यूनिट्स को स्टॉक मार्केट में कभी भी खरीद और बेच सकते हैं, ठीक शेयरों की तरह.

सवाल 4: क्या REITs से होने वाली आय पर टैक्स लगता है?

जवाब: जी हाँ, REITs से मिलने वाले डिविडेंड और कैपिटल गेन पर इनकम टैक्स के नियमों के अनुसार टैक्स लगता है, जो समय-समय पर बदल सकते हैं.

सवाल 5: यह रियल एस्टेट म्यूचुअल फंड से कैसे अलग है?

जवाब: REITs सीधे तौर पर उन प्रॉपर्टीज के मालिक होते हैं जिनसे किराया आता है और उन्हें अपनी 90% आय बांटनी पड़ती है. जबकि रियल एस्टेट म्यूचुअल फंड मुख्य रूप से रियल एस्टेट सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं, वे सीधे प्रॉपर्टी के मालिक नहीं होते.

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