Editor’s Take: घरेलू शेयर बाजारों में इस महीने टैरिफ की अनिश्चितता के चलते लगातार कमजोरी दिखाई दे रही है. अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है. ऐसे में बाजार पर इसका क्या असर होगा और आगे क्या आउटलुक दिखाई दे रहा है, 7 सवालों के जवाब के जरिए जानिए मार्केट गुरु अनिल सिंघवी से.
Q1 – मार्केट के Big Data क्या हैं?
पॉलिसी वाले दिन बैंक निफ्टी ने पूरे दिन एक सीमित दायरे में कारोबार किया और इंट्राडे रेंज को नहीं तोड़ा. बैंक निफ्टी ने एक महीने के निचले स्तर 55,200 के पास सपोर्ट लिया. गौर करने वाली बात यह है कि बैंक निफ्टी ने 13 जून को 55,149 के लो से रिबाउंड करते हुए सिर्फ 14 ट्रेडिंग सेशन्स में करीब 4.5% की तेजी दिखाकर 2 जुलाई को 57,628 का नया हाई बनाया. वहीं, मिडकैप इंडेक्स ने भी पिछले 4 सेशन्स में 56,500 के पास मजबूत सपोर्ट लिया है. रिलायंस का भी ट्रेंड कुछ ऐसा ही रहा, जो लगातार पिछले 9 सेशन्स से 1,380 के स्तर पर मजबूत सपोर्ट बनाए हुए है.
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Q2 – FIIs-DIIs के Big Data क्या हैं?
एफआईआई (FIIs) की बिकवाली का सिलसिला जारी है और 17 मार्च के बाद पहली बार लगातार 13 ट्रेडिंग सेशन्स में उन्होंने कैश मार्केट में बिकवाली की है. इस महीने अब तक FIIs की बिकवाली ₹4,800 करोड़ के साथ सबसे बड़ी रही है. इसके उलट, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 19 जून के बाद लगातार 23 दिन खरीदारी की है और उन्होंने इस महीने ₹6,800 करोड़ की सबसे बड़ी खरीदारी की है. इंडेक्स फ्यूचर्स में FIIs की लॉन्ग पोजीशन केवल 8.58% पर है, जो 22 मार्च 2023 के बाद का सबसे निचला स्तर है. यहां तक कि 2012 के बाद यह पहली बार है जब FIIs लगातार 5 दिन तक इंडेक्स फ्यूचर्स में 10% से नीचे बने हुए हैं.
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Q3 – ग्लोबल के Big Data क्या हैं?
ग्लोबल फ्रंट पर डॉलर इंडेक्स दो हफ्तों के निचले स्तर 98 के नीचे फिसल गया है, जबकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी 4.2% पर आ गई है, जो तीन महीनों का निचला स्तर है. कच्चा तेल भी दबाव में है और पांच हफ्तों के निचले स्तर पर यानी $68 के नीचे कारोबार कर रहा है. वहीं, रुपया 88 के रिकॉर्ड निचले स्तर से सिर्फ 27 पैसे दूर है, जिससे करंसी मार्केट में भी चिंता का माहौल है.
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Q4 – 25% और टैरिफ का एक्सपोर्ट पर कितना असर?
एक्सपोर्ट पर टैरिफ का असर तब तक सीमित रहता है जब तक यह एक हद में हो. लेकिन जैसे ही टैरिफ 25-30% से ऊपर जाता है, एक्सपोर्ट करना लगभग नामुमकिन हो जाता है. भारी-भरकम टैरिफ का कोई वास्तविक कारोबारी फायदा नहीं होता बल्कि यह सिर्फ ट्रंप का ईगो संतुष्ट करने जैसा होता है. चाहे टैरिफ 50% हो या 250%, फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उस स्तर पर एक्सपोर्ट हो ही नहीं पाएंगे. असली समस्या यह है कि जब तक कोई ट्रेड डील नहीं होती, तब तक अनिश्चितता बनी रहेगी. ध्यान देने वाली बात है कि ये नए टैरिफ 27 अगस्त से लागू होंगे, यानी बातचीत के लिए अभी तीन हफ्ते बाकी हैं.
Q5 – नए टैरिफ से लुढ़केंगे बाजार या करेंगे Ignore?
बाजार पहले से ही टैरिफ की खबर को डिस्काउंट कर चुका था, लेकिन कल शाम ट्रंप ने टैरिफ की रेंज और तारीख साफ की. यह सेंटिमेंट के लिहाज़ से जरूर निगेटिव है, लेकिन अब बाजार ट्रंप की घोषणाओं पर ज्यादा रिएक्ट नहीं करता. आज भी GIFT Nifty में 50–100 पॉइंट की गिरावट ट्रंप के टैरिफ से ज्यादा FIIs की बिकवाली के कारण है.
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Q6 – और कितना बेचेंगे FIIs?
FIIs की बिकवाली का सिलसिला अभी खत्म होता नहीं दिख रहा है. इसकी वजह है कमजोर रुपया, ट्रेड डील में देरी और कंपनियों के ढीले-ढाले तिमाही नतीजे. फिलहाल उनके मूड में बदलाव के लिए कोई बड़ा ट्रिगर नज़र नहीं आ रहा. हालांकि शॉर्ट टर्म में FIIs की स्थिति ओवरसोल्ड दिख रही है. इंडेक्स फ्यूचर्स में उनकी पोजीशन 8% के आसपास है. राहत की बात यह है कि घरेलू फंड्स इस बिकवाली का जबरदस्त मुकाबला कर रहे हैं.
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Q7 – बाजार में कहां हैं मल्टीपल मजबूत सपोर्ट?
बाजार में कई लेवल्स पर मजबूत सपोर्ट बनते नजर आ रहे हैं. निफ्टी ने 12 मई के बाद से चार बार 24,450 पर सपोर्ट लिया है, जो अब एक मजबूत बेस बनता जा रहा है. बैंक निफ्टी ने भी 13 जून को 55,150 के लेवल से ही बाउंस किया था. मिडकैप इंडेक्स भी 56,500 के आसपास लगातार सपोर्ट ले रहा है. वहीं, रिलायंस भी पिछले 9 ट्रेडिंग सेशन्स से 1,380 के नीचे नहीं फिसला है, जो इसके लिए एक मजबूत टेक्निकल सपोर्ट का संकेत है.
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