Rajat Sharma’s Blog | वक्फ बिल पास : मोदी दूसरे नेताओं से अलग क्यों हैं ?

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इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

लोकसभा ने आधी रात के बाद वक्फ संशोधन बिल को बहुमत से पारित कर दिया। विधेयक के पक्ष में 288 वोट और विरोध में 232 वोट पड़े। राज्यसभा में गुरुवार को इस बिल पर वोटिंग होगी। लोकसभा में 12 घंटे की मैराथन बहस हुई। लोक सभा में बिल को लेकर जो आशंकाएं जाहिर की गई थी, सरकार की नीयत पर जो शक जताया गया था, उन सारी बातों पर सरकार की तरफ से ठोस जवाब दिये गये। सबसे बड़ा इल्जाम ये था कि वक्फ बिल पास हुआ तो सरकार मुसलमानों की जायदाद पर कब्जा कर लेगी। कानून बदला तो मस्जिदों, ईदगाहों, कब्रिस्तानों को मुसलमानों से छीन लिया जाएगा। पिछले दिनों मुझे बहुत सारे मुस्लिम भाईयों-बहनों से बात करने का मौका मिला। उन्हें तो मस्जिदों में दी गई तकरीरों में मौलानाओं की बातों से यही समझाया गया कि सरकार की नीयत मुसलमानों की प्रॉपर्टी हथियाने की है, इसीलिए वक्फ का कानून बदला जा रहा है। ज्यादातर लोगों के पास कानून को पढ़ने समझने की फुर्सत नहीं है, इसीलिए वो मौलानाओं और मौलवियों की बातों पर यकीन कर लेते हैं, लेकिन बुधवार को अमित शाह ने जिस तरह से समझाया कि मुसलमानों की प्रॉपर्टी पर कब्जा करने का न कोई इरादा है, न कोई प्रावधान। अमित शाह ने मिसाल देकर समझाया कि वक्फ ने किस किस जगह सरकारी प्रॉपर्टी पर कब्जा किया हुआ है और ये भी बताया कि वक्फ की महंगी प्रॉपर्टी को किस तरह औने पौने दामों पर होटलों को और प्राइवेट लोगों को बेचा जाता है। फिर ये भी बताया कि वक्फ के पास हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति है, पर उनसे होने वाली सालाना कमाई सिर्फ 126 करोड़ रुपये है। जो इन सारी बातों को सुनेगा, उसे समझ आ जाएगा कि सरकार को वक्फ के कानून में बदलाव क्यों करना पड़ा और ये कानून बदलने से ,मस्जिदों ईदगाहों और कब्रिस्तानों को कोई खतरा नहीं है। वो मुसलमानों के हैं और उन्हीं के रहेंगे। 

पिछले कई हफ्तों से गांवों में मुसलमानों को ये समझाया गया कि अगर वक्फ का कानून बदला तो सरकार मुसलमानों की प्रॉपर्टी पर कब्जा कर लेगी। मस्जिदों, कब्रिस्तानों को हड़प लेगी। लेकिन बुधवार को पूरी बहस के दौरान इस बिल का विरोध करने वाला कोई नेता ये नहीं बता पाया कि इस बिल में ऐसा प्रावधान कहां है? मुसलमानों की प्रॉपर्टी पर कब्जा कैसे होगा ? सारा फोकस मुसलमानों की ठेकेदारी पर था। तर्क दिया गया कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, RJD और समाजवादी पार्टी मुसलमानों की हिमायत कर सकती हैं लेकिन बीजेपी मुसलमानों की भलाई  की बात करने वाली कौन होती है? दलील तो ये दी गई कि बीजेपी को मुसलमान वोट नहीं देते, बीजेपी का कोई मुसलमान MP नहीं है, तो फिर बीजेपी को मुसलमानों की भलाई की बात करने का क्या अधिकार है? विरोधी दलों की बहस इस बात पर थी कि बीजेपी सरकारें मुसलमानों को सड़क पर नमाज पढ़ने से रोकती हैं, मोदी सरकार ने तीन तलाक खत्म करने वाला कानून बनाया, इसीलिए अगर बीजेपी मुसलमानों के फायदे की बात करती है तो इसमें कुछ गड़बड़ जरूर होगी। विपक्ष के लोगों ने जो कहा ,उसका मतलब था, बीजेपी की सरकारें कुंभ मेला कराएं, काशी विश्वनाथ और महाकाल का कॉरिडोर बनाएं तो ठीक है, पर बीजेपी मुसलमानों की बात क्यों करती है, क्योंकि मुसलमानों की ठेकेदारी तो विपक्ष के नेताओं की है। सच बात ये है कि नरेंद्र मोदी से पहले की सरकारें मुसलमानों से जुड़े किसी भी कानून को छेड़ने से डरती थी, वे मुस्लिम वोटों के ठेकेदारों से खौफ खाती थीं। मुस्लिम वोट मिलता रहे, इस वजह से मुसलमानों को नाराज़ करने के ख्याल से भी घबराती थीं। नरेंद्र मोदी ने इस नैरेटिव को बदला है। मोदी को भी ये कहकर डराया गया कि वक्फ का बिल लाएंगे तो JD-U साथ छोड़ जाएगी, TDP भाग जाएगी, सरकार गिर जाएगी। पर नरेंद्र मोदी अलग मिट्टी के बने हैं। वो ऐसी बातों से डरे नहीं, अपनी बात पर डटे रहे। यही बात मोदी को बाकी लीडरों से अलग बनाती है। (रजत शर्मा)

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