कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI ने इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स (IA) और रिसर्च एनालिस्ट्स (RA) को एक साल तक की एडवांस फीस लेने की इजाजत दे दी है। अभी तक IA ग्राहक के सहमत होने पर दो तिमाहियों तक के लिए एडवांस फीस ले सकते थे। वहीं RA को एडवांस में केवल एक तिमाही की फीस लेने की इजाजत थी। SEBI के बोर्ड ने 24 मार्च की मीटिंग में इस बदलाव के लिए मंजूरी दी थी।
SEBI ने 2 अप्रैल को सर्कुलर में कहा, “अगर ग्राहक की ओर से सहमति दी जाती है, तो IA और RA एडवांस में फीस ले सकते हैं। लेकिन, इस तरह की एडवांस फीस एक वर्ष की अवधि की फीस से अधिक नहीं होगी।” फीस की लिमिट, पेमेंट मोड, रिफंड और ब्रेकेज फीस से जुड़ी कंप्लायंस रिक्वायरमेंट्स केवल इंडीविजुअल और हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (HUF) क्लाइंट्स पर लागू होंगी। नॉन-इंडीविजुअल क्लाइंट्स, मान्यता प्राप्त निवेशकों और प्रॉक्सी एडवायजर की सिफारिश चाहने वाले इंस्टीट्यूशनल निवेशकों के मामले में फीस संबंधी नियम और शर्तें, द्विपक्षीय बातचीत के बाद समझौते की शर्तों के अनुसार तय होंगे। नए दिशानिर्देश SEBI का सर्कुलर जारी होने की तारीख से लागू होंगे।
पहले भी तर्कसंगत बनाए गए हैं IA और RA से जुड़े नियम
SEBI ने बोर्ड मीटिंग के बाद कहा था कि उद्योग की कई चिंताओं को दूर करने के लिए पहले भी IA और RA से जुड़े नियमों को तर्कसंगत बनाया गया था। ज्यादातर बदलावों का उन्होंने स्वागत किया है। हालांकि फीस संबंधी कुछ प्रावधानों पर चिंताएं बनी हुई थीं, जो IA और RA की ओर से एडवांस फीस लिए जाने को छह महीने या तीन महीने तक सीमित करती हैं। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने मीटिंग के बाद कहा था, ‘‘इन चिंताओं को दूर करने के लिए, बोर्ड ने फैसला किया है कि अगर ग्राहक सहमत हो, तो IA और RA एक साल तक की एडवांस फीस ले सकते हैं।’’
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SEBI ने अपनी मीटिंग में बोर्ड के सदस्यों और अधिकारियों के हितों के टकराव; प्रॉपर्टी, निवेश और देनदारियों से संबंधित खुलासे की व्यापक समीक्षा करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति (High Level Committee) गठित करने का भी फैसला किया था। समिति को गठन की तारीख से 3 महीने के अंदर अपनी सिफारिशें पेश करनी होंगी। इस रिपोर्ट को विचार के लिए सेबी के बोर्ड के सामने रखा जाएगा।
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