बलूचिस्तान के लड़ाके और अलगाववादी मिलिटेंट ग्रुप बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पाकिस्तानी सेना की नींद उड़ा दी है. बीएलए ने दावा किया है कि उसने कई पाकिस्तान सैनिकों को पकड़ लिया है. इधर, पाकिस्तानी सेना ने इनकार किया है कि ये हमारे लोग नहीं हैं. इस पर बीएलए ने पाकिस्तान सेना को चुनौती देते हुए, एक वीडियो जारी किया है. इसमें करीबन 8 पाकिस्तानी सैनिक हैं, जो बीएलए की कस्टडी में हैं. बीएलए ने कुछ वक्त पहले कैदियों की अदला-बदली के लिए खुद से बताई गई डेडलाइन खत्म होने से पहले इसको लेकर वीडियो जारी किया है.
बीएलए ने अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है. इसमें हिरासत में लिए गए सैनिक कैमरे के सामने अपने कथित ऑफिशियल सर्विस ID कार्ड और नागरिक होने के दस्तावेज दिखा रहे हैं. साथ ही पाकिस्तान सेना के अधिकारियों से मदद की अपील भी उनकी तरफ से की जा रही है.
वीडियो में रोते हुए नजर आ रहे सैनिक
बीएलए की तरफ से जारी वीडियो में गिरफ्त लोग कहते हुए नजर आ रहे हैं, कि सेना कैसे कह सकती है कि हम उनके लोग नहीं हैं? यह किसका कार्ड है, पाकिस्तान ने मुझे यह दिया है? मैं अपील करता हूं, भगवान के लिए, मेरे पिता डिसेबल्ड हैं और मैं घर में सबसे बड़ा हूं. यह कहकर नाइंसाफी मत करो कि हम तुम्हारे लोग नहीं है.
इस दौरान वीडियो में बोलते हुए नजर आ रहे सैनिक ने पाकिस्तान अधिकारियों से गुहार लगाई है. साथ ही कहा है कि अगर तुम यह कह रहे हो, हम तुम्हारे लोग नहीं हैं, तो तुमने मुझे भर्ती क्यों किया? तुम क्यों कह रहे हो, कि वीडियो फेक है?
असल में हफ्ते भर पहले बीएलए ने दावा किया था कि इस हफ्ते की शुरुआत में विद्रोही ग्रुप ने कैदियों की अदला-बदली के लिए पाकिस्तानी सरकार को सात दिन की डेडलाइन दी थी. इसमें चेतावनी दी थी कि अगर इस समय के अंदर बातचीत नहीं हुई तो कैदियों को फांसी दी जा सकती है. बीएलए ने डेडलाइन 22 फरवरी तक दी थी. मुश्किल से 48 घंटे ही पाकिस्तान सेना के पास बचे हैं.
बीएलए ने वीडियो जारी कर कहा- सिर्फ 3 दिन बचे
बीएलए ने दावा किया था कि ऑपरेशन हेरोफ के दूसरे फेज के दौरान इन कैदियों को पकड़ा गया था. कुछ कैदियों को पहले चेतावनी देते हुए छोड़ दिया था. उनकी पहचान एथनिक बलूच के तौर पर हुई थी. वे लोकल पुलिस से जुड़े थे. बाकी कैदी पाकिस्तानी आर्मी की रेगुलर यूनिट के मेंबर थे. इन्हें कैद में रखा गया था. उन पर बलूच राष्ट्रीय अदालत में कार्रवाई की गई थी. बीएलए ने कहा है कि अगर पाकिस्तानी सरकार ऑफिशियली युद्धबंदियों की अदला-बदली करने की इच्छा दिखाती है, तो इन कैदियों को पाकिस्तानी अधिकारियों की तरफ से पकड़े गए बलूच कैदियों की रिहाई के बदले में बदला जा सकता है.
इधर, बीएलए के दावों के बीच पाकिस्तान सेना के अधिकारियों ने कथित तौर पर इनकार करते हुए कहा है कि उनका कोई आदमी लापता नहीं है. न ही कोई बागियों की कस्टडी में है. साथ ही कैदियों के अदला-बदली को सिरे से नकार दिया था.
बीएलए ने वीडियो जारी करते हुए कहा कि बातचीत तुरंत होना चाहिए क्योंकि सात दिन के अल्टीमेटम में सिर्फ 3 दिन बचे हैं. अगर डेडलाइन के अंदर बातचीत नहीं हुई तो हिरासत में लिए लोगों को फांसी दी जाएगी. अभी तक न पाकिस्तान सेना और न ही शहबाज शरीफ सरकार ने वीडियो पर किसी तरह की प्रतिक्रिया दी है.
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