Editor’s Take: भारतीय शेयर बाजारों में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार प्रेशर बना हुआ है. गुरुवार को निफ्टी और बैंक निफ्टी दोनों ने ही “लोअर हाई, लोअर लो” का पैटर्न बनाया. मार्केट गुरु अनिल सिंघवी ने कहा कि खास बात ये रही कि निफ्टी ने 12 मई के बाद पहली बार 24,378 का अहम इंट्राडे सपोर्ट लेवल तोड़ा और 9 मई के बाद लगभग तीन महीने का नया निचला स्तर 24,344 छू लिया. इतना ही नहीं, 17 अप्रैल के बाद पहली बार निफ्टी अपने 100-DMA (24473) के नीचे भी बंद हुआ. हालांकि, दिन में जो 289 अंकों की जोरदार रिकवरी आई, वो 26 जून के बाद की सबसे बड़ी रिकवरी रही, जो बाजार में शॉर्ट टर्म बॉटम की संभावना का संकेत देती है.
बैंक निफ्टी की बात करें तो 13 जून के बाद पहली बार 55,149 का बड़ा सपोर्ट टूट गया और दो महीने का नया निचला स्तर 54,973 दर्ज किया गया. इसी तरह, मिड और स्मॉलकैप इंडेक्स भी दो महीने के निचले स्तर पर फिसले. वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर भी फिसलकर 1,366 पर पहुंचे, जो पिछले तीन महीनों का सबसे कमजोर स्तर है.
FII-DII डाटा: एक तरफ बिकवाली, दूसरी तरफ खरीदारी की ताकत
FII और DII की चाल इस समय एकदम विपरीत है. 17 मार्च के बाद पहली बार FIIs ने लगातार 14 दिन बिकवाली की है. बुधवार को ही FIIs ने कैश सेगमेंट में 4,997 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की. हालांकि इस आंकड़े में Eternal और Kotak की ब्लॉक डील मिलाकर करीब 6,131 करोड़ रुपये का लेन-देन भी शामिल है.
इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) लगातार 24वें दिन खरीदारी करते दिखे. 28 फरवरी के बाद यह DII की सबसे बड़ी खरीदारी रही: कुल 10,864 करोड़ रुपये की.
FII की इंडेक्स फ्यूचर्स में लॉन्ग पोजीशन सिर्फ 8.59% पर है, जो 22 मार्च 2023 के बाद का सबसे निचला स्तर है. इतना ही नहीं, 2012 के बाद पहली बार FIIs लगातार 6 दिनों से 10% से भी नीचे की लॉन्ग पोजीशन पर बने हुए हैं.
ग्लोबल संकेत: सोना-चांदी चमके, कच्चा तेल फिसला
ग्लोबल मार्केट से मिले संकेत भी बाजार के सेंटीमेंट्स को प्रभावित कर रहे हैं. सोने ने घरेलू बाजार में ₹1,02,155 और इंटरनेशनल मार्केट में $3,534 का नया रिकॉर्ड हाई छू लिया. चांदी लगातार छठे दिन चढ़ी और $39 के लेवल को छू लिया, जो दो हफ्तों की ऊंचाई है.
डॉलर इंडेक्स 98 के नीचे फिसला है, जो दो हफ्तों का सबसे निचला स्तर है. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 4.2% पर है, जो 3 महीनों के निचले स्तर के पास है. वहीं, कच्चा तेल भी लगातार गिरकर $66 के पास आ गया है, जो दो महीने का निचला स्तर है.
टैरिफ फ्रंट पर नया क्या है?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का अड़ियल रुख बरकरार है. उन्होंने दोहराया है कि जब तक भारत रूस से तेल इंपोर्ट बंद नहीं करेगा, तब तक ट्रेड डील की कोई बातचीत नहीं होगी. भारत की ओर से इस पर क्या रुख रहेगा, यह आज की कैबिनेट मीटिंग में साफ हो सकता है. अच्छी बात ये है कि ब्राजील और रूस जैसे देशों से भारत को समर्थन मिल रहा है, जो ट्रेड डिप्लोमेसी में एक पॉजिटिव संकेत है.
बाजार ओवरसोल्ड है या रिकवरी में दम है?
बुधवार की रिकवरी के बावजूद यह कहना मुश्किल है कि बाजार ओवरसोल्ड से निकल गया है. FIIs की तरफ से शॉर्ट कवरिंग के संकेत नहीं मिले हैं, और उनकी फ्यूचर्स पोजीशन अभी भी सिर्फ 8.5% पर है. ऐसे में अगर टैरिफ को लेकर कोई पॉजिटिव खबर आती है, तो वो शॉर्ट कवरिंग का ट्रिगर बन सकती है.
क्या कल के निचले स्तरों पर बाजार टिकेगा?
तकनीकी लिहाज से देखें तो बाजार अभी भी रिस्क जोन से पूरी तरह बाहर नहीं है. कल भी लोअर हाई, लोअर लो का फॉर्मेशन बना था, जो कमजोरी का संकेत है. हालांकि, कल के निचले स्तर अब मजबूत सपोर्ट के रूप में काम कर सकते हैं. वीकली क्लोजिंग के लिहाज से निफ्टी को 24,675 और बैंक निफ्टी को 55,650 के ऊपर बंद होना जरूरी है.
क्या हैं सबसे अहम टेक्निकल लेवल्स?
अब बाजार के लिए सबसे अहम होगा कि वह कल के निचले स्तरों को होल्ड कर पाए. अगर निफ्टी 24,325 और बैंक निफ्टी 54,950 के नीचे जाता है, तो फिर नई कमजोरी देखने को मिल सकती है. तेजी तभी लौटेगी जब निफ्टी 24,850 और बैंक निफ्टी 56,000 के ऊपर निकलेगा.
सुस्त शुरुआत पर क्या करें: खरीदें या बेचें?
अगर बाजार की शुरुआत कमजोर होती है, तो जल्दबाजी न करें. रेंज के निचले सिरे पर खरीदारी करना बेहतर हो सकता है. वहीं, रिकवरी आती है तो ऊपरी रेंज पर पोजीशन को हल्का करना समझदारी होगी.
FIIs की बिकवाली से डरें या DIIs पर भरोसा रखें?
हालांकि FIIs की बिकवाली डराने वाली लग रही है, लेकिन इसमें ब्लॉक डील का बड़ा हिस्सा शामिल है. अगर उसे हटाकर देखें, तो FIIs की नेट पोजीशन निगेटिव नहीं है. इसके अलावा घरेलू फंड्स का जोरदार समर्थन बाजार को नीचे में सहारा दे सकता है. ऐसे में निवेशकों को निचले स्तरों पर बाजार में सपोर्ट मिलने की उम्मीद रखनी चाहिए.
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