RBI monetary policy : वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही तक ब्याज दर में किसी भी तरह की ढील की संभावना नहीं : एक्सपर्ट्स

RBI monetary policy: RBI ने आज वित्त वर्ष 2025 की पहली पॉलिसी जारी कर दी है। RBI ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। रेपो रेट 6.50 फीसदी पर बरकरार रखा गया है। MSF और बैंक रेट भी 6.75 फीसदी पर बरकरार रखे गए हैं। MPC सदस्यों में 5-1 की सहमति से ये फैसला लिया है। इसके साथ ही ‘WITHDRAWAL OF ACCOMMODATION’ यानी उदार मौद्रिक नीति को वापस लेने का रुख भी बरकरार रखा गया है। आज की आरबीआई पॉलिसी एक्सपर्ट्स के नजरिए से कैसी रही आइए डालते हैं इस पर एक नजर।

मिलवुड केन इंटरनेशनल के फाउंडर और सीईओ निश भट्ट की राय

मिलवुड केन इंटरनेशनल के फाउंडर और सीईओ निश भट्ट ने कहा आरबीआई ने लगातार सातवीं नीतिगत समीक्षा में अपनी दरों को 6.5 फीसदी पर बरकरार रखा है। एकोमोडेटिव रुख को वापस लेने के नजरिए में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इससे यह संकेत मिलता है कि आरबीआई महंगाई पर फोकस कर रहा है और इसे 4 फीसदी के लक्ष्य तक लाने को सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता बनाए हुए है।

हालांकि, बढ़ते जियोपोलिटिकल जोखिम से जुड़ी अनिश्चितताओं, खाद्य कीमतों और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर नजर रखने की जरूरत है क्योंकि ये लगातार चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। इनकी वजह से महंगाई के बढ़ने का जोखिम है जो डिफ्लेशन (अवस्फीति) की स्थिति पैदा करके गाड़ी को पटरी से उतार सकते हैं।

कोटक महिंद्रा बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज की राय

कोटक महिंद्रा बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज का कहना है कि एमपीसी ने उम्मीद के मुताबिक ही दरों और अपने रुख पर यथास्थिति बनाए रखा है। कोर महंगाई में नरमी से राहत मिली है लेकिन खाद्य महंगाई पर अनिश्चितता चिंता का विषय बनी हुई है। इसके अलावा हाई यूएस बॉन्ड यील्ड, तेल की कीमतों में बढ़त और दूसरी वस्तुओं के साथ-साथ फेड की दर कटौती में संभावित देरी एमपीसी को सावधान रखेगा। ऐसे में हमें वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही तक दर में किसी भी तरह की ढील की बहुत अधिक संभावना नहीं दिख रही है।

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के संतोष मीना राय

संतोष मीना ने कहा उम्मीद के मुताबिक आरबीआई की पॉलिसी में कोई सरप्राइज वाला एलीमेंट नहीं था। इसमें ब्याज दरों, नीतिगत रुख या जीडीपी और महंगाई के पूर्वानुमानों में कोई एडजस्टमेंट नहीं किया गया था। इस पर बाजार की प्रतिक्रिया सुस्त रही है। बाजार का फोकस जून में अमेरिकी फेडरल रिजर्व दर में कटौती की बढ़ती संभावना और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसे ग्लोबल फैक्टर पर केंद्रित हो गया है। इस वोलैटिलिटी के बावजूद भारतीय बाज़ार शायद प्री-इलेक्शन रैली की उम्मीद में अपनी पकड़ बनाए हुए लग रहे हैं।

निफ्टी फिलहाल 22,200 और 22,600 के दायरे में कारोबार कर रहा है। संतोष मीना का मानना है कि 22,600 से ऊपर का ब्रेकआउट निफ्टी के 22,800 या 23,000 की ओर बढ़ने का संकेत दे सकता है। वहीं, बैंक निफ्टी को 48,200 से 48,600 के जोन में तत्काल रजिस्टेंस का सामना करना पड़ रहा है। इस बाधा पर काबू पाने से बैंक निफ्टी में 50,000 तक की बढ़ोतरी हो सकती है। नीचे की तरफ इसके लिए 47,700 -47,200 पर सपोर्ट देखने को मिल सकता है।

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कोटक अल्टरनेट एसेट मैनेजर्स की लक्ष्मी अय्यर की राय

लक्ष्मी अय्यर का कहना है कि आरबीआई एमपीसी ने दरों और पॉलिसी पर अपने रुख में यथास्थिति के लिए 5-1 से वोट दिया। इस पॉलिसी का मुख्य फोकस महंगाई को नियंत्रित करना रहा । फरवरी 2024 के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में 15 फीसदी की बढ़त को देखते हुए यह समझ में आता है। इस समय भारत की स्थिति से रेगिस्तान में एक नखलिस्तान जैसी है। फिर भी भारत में जल्द ही दरों में कटौती की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। बाजार को दरों में कटौती का इंतजार लंबे समय तक करना पड़ सकता है।

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