Zee-Sony merger: NCLAT मामले पर अगली कार्रवाई के लिए 15 अप्रैल को अपील पर देगा फैसला

Zee-Sony merger: नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) ने 4 अप्रैल को संकेत दिया कि वह 15 अप्रैल को एक आदेश देगा कि क्या जी-सोनी विलय (Zee-Sony merger) की कानूनी मंजूरी की चुनौतियों पर सुनवाई उस समय भी की जा सकती है जब विलय को ही रद्द कर दिया गया हो। आईडीबीआई बैंक और एक्सिस बैंक ने NCLAT से आग्रह किया कि जब तक नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (National Company Law Tribunal (NCLT) विलय को लागू करने के लिए जी की याचिका पर फैसला नहीं कर लेता, तब तक लंबित मामले को स्थगित कर दिया जाये। हालांकि जी ने तर्क दिया कि NCLT में याचिका के लंबित रहने का वर्तमान मामले पर कोई असर नहीं पड़ेगा और उन्होंने NCLAT से मामले की सुनवाई जारी रखने का आग्रह किया।

IDBI Bank की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) वेंकटरमन ने तर्क दिया कि NCLT में Zee की याचिका के नतीजे का मामले पर असर पड़ेगा क्योंकि यह विलय का भविष्य तय करेगा। हालांकि Zee की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कठपालिया ने तर्क दिया कि NCLAT में मामला Zee-Sony merger की मंजूरी के खिलाफ एक अपील है। NCLT में मामला विलय को लागू करने से संबंधित है।

NCLAT ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले में दी गई दलीलों को दर्ज किया। NCLAT संकेत दिया कि भविष्य की कार्रवाई पर एक आदेश 15 अप्रैल दिया जाएगा।

आईडीबीआई बैंक, आईडीबीआई ट्रस्टीशिप और एक्सिस ट्रस्टीशिप ने विलय को कानूनी मंजूरी देने के अगस्त के NCLT के आदेश को चुनौती दी थी।

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22 जनवरी को सोनी ने विलय रद्द कर दिया। यह कदम आंशिक रूप से उठाया गया। इसकी वजह ये बताई थी कि जी सौदे की कुछ वित्तीय शर्तों को पूरा करने और उसका समाधान करने की योजना बनाने में विफल रहा। जी ने इन आरोपों से इनकार किया और जापानी कंपनी पर विलय को रद्द करने में “बैड फेथ” का आरोप लगाया।

सोनी से विलय को लागू करने के लिए कहने वाली एक याचिका वर्तमान में मुंबई में NCLT में लंबित है।

NCLAT में अब तक की मुकदमेबाजी:

15 दिसंबर को NCLAT ने Zee-Sony merger plan पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। NCLAT ने कहा कि भले ही विलय अदालत के आदेशों के अधीन है, फिर भी वे मामले की मेरिट के आधार पर सुनवाई किए बिना इस पर रोक नहीं लगा सकते। हालांकि विलय के रद्द होने के कारण तब से मामले में बहुत कुछ नहीं हुआ है।

NCLT ने 10 अगस्त को Zee Entertainment और Sony Pictures Networks India के विलय को मंजूरी दे दी थी। जिससे देश में 10 अरब डॉलर की दिग्गज मीडिया कंपनी बनने का रास्ता खुल गया था।

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