डिफेंस सेक्टर पर क्यों बुलिश है यह इंटरनेशनल ब्रोकेरेज फर्म, जानें 4 अहम वजहें

इंटरनेशनल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) के एनालिस्ट्स भारत में डिफेंस कंपनियों के शेयरों को लेकर बुलिश हैं। दरअसल, भारत सरकार का जोर डिफेंस आइटम की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग पर है। सरकार इन आइटम के मामले में इंपोर्ट पर निर्भरता कम करना चाहती है।

ब्रोकरेज ने इस सेक्टर की कंपनियों- HAL, BEL, डेटा पैटर्न्स (Data Patterns) को बाय रेटिंग दी है। पिछले 5 साल में ज्यादातर डिफेंस कंपनियों के शेयरों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। उदाहरण के लिए, HAL के शेयरों में 9 गुना बढ़ोतरी हुई है, जबकि BEL का शेयर 6 गुना बढ़ा है। डेटा पैटर्न्स के शेयरों में लिस्टिंग के बाद से तकरीबन 3 गुना की बढ़ोतरी हुई है।

हम आपको यहां बता रहे हैं कि जेफरीज डिफेंस सेगमेंट को लेकर क्यों बुलिश है:

डिफेंस पर काफी ज्यादा खर्च करने वाले देशों में शामिल है भारत

भारत डिफेंस पर खर्च करने के मामले में एशिया में दूसरे नंबर पर, जबकि ग्लोबल स्तर पर तीसरे नंबर पर है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पिछले 5-6 साल में घरेलू स्तर पर डिफेंस सेक्टर में 100-120 अरब डॉलर के कारोबारी मौके हैं। कैलेंडर ईयर 2022 में भारत का कुल डिफेंस खर्च अमेरिकी के डिफेंस खर्च का 10 पर्सेंट और चीन के डिफेंस खर्च का 27 पर्सेंट था।

एक्सपोर्ट ग्रोथ

वित्त वर्ष 2019 से वित्त वर्ष 2024 के दौरान भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट में 2 गुना की बढ़ोतरी हुई है। जेफरीज के अनुमानों के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2024-2030 के अनुमानों में एक्सपोर्ट में 2.5 गुना की बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि सरकार ने इसमें 3 पर्सेंट की बढ़ोतरी का टारगेट रखा है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘PSU कंपनियां और उनके वेंडर इस ग्रोथ की अगुवाई कर सकते हैं। ऐसे में हमारा मानना है कि वित्त वर्ष 2023 तक इस सेक्टर में डबल डिजिट ग्रोथ रहेगी और हम डेटा पैटर्न्स, HAL और BEL को लेकर बुलिश हैं।’

न्यू एक्सपोर्ट मार्केट

भारत के लिए डिफेंस एक्सपोर्ट के प्रमुख बाजारों में इटली, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), भूटान, इथोपिया, सऊदी अरब जैसे देश शामिल हैं। जेफरीज के मुताबिक, मध्य-पूर्व के देशों में भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट की जबरदस्त संभावनाएं हैं। ब्रोकरेज फर्म के नोट के मुताबिक, फिलहाल ग्लोबल स्तर पर आर्म इंपोर्ट का बाजार तकरीबन 11 अरब डॉलर का है और इसमें मध्य पूर्व देशों की हिस्सेदारी 33 पर्सेंट है।

भूराजनीतिक तनाव, स्वदेशी पर भारत का जोर

1990 से 2000 के दौरान ग्लोबल डिफेंस पर खर्च में गिरावट हुई थी। हालांकि, इसके बाद से इसमें बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। 2016-2022 के दौरान डिफेंस खर्च में 3 पर्सेंट सीएजीआर की दर से बढ़ोतरी हुई। इसमें यूक्रेन की अहम भूमिका रही। इस अवधि में डिफेंस सेक्टर पर खर्च बढ़ाने वाले बाकी देशों में चीन (5% CAGR) और भारत (4% CAGR) भी प्रमुख थे। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक, डिफेंस उपकरण के इंपोर्ट के मामले में भारत दूसरे नंबर पर है और भारत के घरेलू डिफेंस खर्च में डबल डिजिट ग्रोथ हासिल हो सकती है।

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